जम्मू-कश्मीर में इस सीट पर बड़ी और कड़ी टक्कर है। यहां नेकां ने मुबारक गुल, पीडीपी ने मोहम्मद खुर्शीद, पीसी ने इरफान मट्टू तो भाजपा ने आरिफ मजीद को उतारा है।
ईदगाह विधानसभा क्षेत्र में इस बार बड़ी और कड़ी टक्कर के आसार हैं। कारण, सभी पार्टियों ने अपने-अपने कद्दावर नेताओं को यहां से उतारा है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के मुबारक गुल, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के मोहम्मद खुर्शीद, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (पीसी) के इरफान मट्टू तो भाजपा के आरिफ मजीद ने चुनाव मैदान में ताल ठोंकी है।
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नेकां के गुल पांचवीं बार खिलने के लिए जमीन बना रहे हैं। ईदगाह विधानसभा सीट के लिए 25 सितंबर को मतदान होना है और मैदान में 13 उम्मीदवार हैं। चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवारों में नेकां प्रत्याशी मुबारक गुल ने एक भी विधानसभा चुनाव नहीं हारा है।
वर्ष 1996, 2002, 2008 और 2014 में ईदगाह सीट से लगातार चार चुनाव में गुल विजेता रहे। इस बार गुल का मुकाबला पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के खुर्शीद आलम, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आरिफ मजीद और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (पीसी) के मोहम्मद खुर्शीद सहित अन्य नेताओं से होगा।
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भाजपा ने अंतिम बार 2002 में उतारा था प्रत्याशी
अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद भाजपा ने पूरे दमखम के साथ श्रीनगर की ईदगाह सीट पर अपना प्रत्याशी उतारा है। पार्टी ने अंतिम बार 2002 में अब्दुल खालिद भट्ट को उतारा था। तब पार्टी ने 2.69 फीसदी वोट शेयर हासिल किया था। इस बार भाजपा ने चेहरा भी बदला है।
सीट का इतिहास...निर्दलीय भी देते रहे टक्कर
ईदगाह सीट पर बीते तीन चुनाव का इतिहास देखें तो यहां पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी कड़ी टक्कर दी है। विस चुनाव 2002 में मोहम्मद अशरफ बख्शी ने निर्दलीय लड़ते हुए नेकां प्रत्याशी गुल को टक्कर देते हुए 22.35 फीसदी वोट शेयर हासिल किया। वह दूसरे स्थान पर रहे। तीसरे स्थान पर भी निर्दलीय अब्दुल गनी खान रहे।
भाजपा चौथे स्थान पर रही। 2008 विस चुनाव में गुल को पीडीपी के अशरफ तारिक कर्रा ने कड़ी टक्कर दी और 1677 वोट से हारे। तीसरे स्थान पर निर्दलीय अली मोहम्मद वानी रहे। 2014 विस चुनाव में गुल को फिर पीडीपी से टक्कर मिली।
इस बार अली मोहम्मद वानी को पीडीपी ने चेहरा बनाया है। वानी मात्र 608 वोट से हारे थे। तीनों चुनाव नतीजों को देखें तो नेकां प्रत्याशी गुल का जीत का मार्जिन लगातार कम होता नजर आता है।
अच्छन डंपिंग साइट शिफ्ट नहीं होने का मलाल
स्थानीय महराज अहमद ने कहा कि पुराने नेताओं ने कुछ काम नहीं किया है। कई वर्षों से इलाके में अच्छन डंपिंग साइट शिफ्ट नहीं हो पाई। इससे इलाके में बदबू रहती है। घरों की खिड़कियां खोलना मुश्किल होता है। गुलरेज अख्तर ने कहा कि इलाके में सड़क संपर्क की दिक्कत है। मीटर तो लगे हैं लेकिन 24 घंटे बिजली नहीं।