जम्मू के अखनूर में तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक बस वीरवार को जम्मू-पुंछ हाईवे पर सड़क से फिसलकर 150 फीट गहरी खाई में खाई में गिर गई। इस भीषण हादसे में 22 लोगों की मौत हो गई, जबकि 69 घायल हैं। बस में 90 से अधिक लोग सवार थे।
अलीगढ़ के नाया से तीर्थयात्रा पर जाने से पहले माता को नारियल चढ़ाने के दौरान अपशकुन हुए थे, लेकिन लक्ष्मण प्रसाद शर्मा ने इसे नजरंदाज कर दिया था। अपशकुन होने पर उन्होंने तीर्थयात्रा पर जाने से मना किया था लेकिन उनके भाई ने उनकी बात नहीं मानी। बात मृतक लक्ष्मण शर्मा के भाई बालकिशन शर्मा ने रविवार को बताई।
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कहा कि जब भी माता का बुलावा आता है वह दर्शन करने जाते रहते हैं। नोएडा से गांव आने के बाद माता का दर्शन करने के लिए गांव से निकरौसी के दौरान दो बार अपशकुन हुए थे। माता की भेंट के लिए जैसे ही नारियल रखा जाने लगा तो छींक हुई लेकिन उनके भाई लक्ष्मण प्रसाद शर्मा ने यह कहते हुए इस अपशकुन नहीं माना कि यह कोई बात नहीं है।
इसके बाद जैसे ही हवन में जायफल चढ़ाया गया तो जायफल बीच में ही गिर गया। दूसरी बार में जब लक्ष्मण शर्मा के बेटे तनुज ने जायफल चढ़ाया तो फिर बीच में ही गिर गया था। इस पर उन्होंने अपने भाई को तीर्थयात्रा पर जाने से मना किया था, लेकिन वह नहीं माने।
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रविवार की सुबह सुनीता के शव को पुत्र पंकज ने दी मुखाग्नि
अखनूर बस हादसे में मृत गांव नाया निवासी सुनीता पत्नी भगवान सिंह के शव को रविवार की सुबह करीब छह बजे पुत्र पंकज ने गांव में मुखाग्नि दी। इस दौरान गमगीन ग्रामीण वहां पर मौजूद रहे। इससे पहले रात दो बजे के बाद शव घर पहुंचने पर पत्नी का चेहरा देखते ही घायल भगवान सिंह बिलखकर रोते हुए बेहोश हो गए। परिजन व रिश्तेदारों ने किसी तरह उन्हें संभाला। इस हादसे में नाया गांव के 12 लोगों की जान गई है।
11 शव शनिवार की शाम गांव पहुंच गए थे, लेकिन सुनीता पत्नी भगवान सिंह का शव हाथरस के शवों के साथ झेलम एक्सप्रेस से देर रात मथुरा पहुंचा था। वहां से एंबुलेंस के जरिये रात करीब दो बजे बहन का बेटा सोनू एंबुलेंस से सुनीता का शव गांव लाया। गांव के पंचायत घर में ताबूत उतारा गया। यहां से परिजन शव को घर ले गए।
शव को देखते ही इसी हादसे में घायल पति भगवान सिंह बिलख-बिलख कर रो पड़े। वह रोते-रोते बेहोश हो गए। रिश्तेदारों व ग्रामीणों ने उन्हें संभाला। होश में लाने के बाद सांत्वना देते हुए उन्हें शांत कराया। इसके बाद ताबूत में ही शव को श्मशान घाट तक ले जा गया, जहां पुत्र पंकज ने चिता को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के समय तहसीलदार उदयवीर सिंह, कोतवाल कोमल सिंह सहित राजस्व, विकास व पुलिस विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे।
शनिवार को इनके शवों का हुआ था अंतिम संस्कार
सबरजीत सिंह, उनकी पत्नी सीमा देवी, सुनीता पत्नी रवेंद्र सिंह, तनुज पुत्र संजय सिंह, तनुज के बाबा सुरेश सिंह, संजय पुत्र सुंदर सिंह, सोनू उर्फ अंजली पुत्री सुभाष सिंह, लक्ष्मण प्रसाद शर्मा पुत्र रघुनाथ शर्मा, अनामिका पत्नी लक्ष्मण प्रसाद शर्मा तथा लक्ष्मण प्रसाद शर्मा के बेटे रुद्र व बेटी नैंसी।