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Jammu News: 10 वर्ष में 357 नागरिकों, 575 सुरक्षाबलों के बलिदान का बदला है एयर स्ट्राइक

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जैश और लश्कर ने दिया बड़ा जख्म उड़ी, पुलवामा, डांगरी जैसे बड़े हमले किए
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पीओके और पाकिस्तान में बने कैंपों से किए गए तमाम हमले
अजय मीनिया
जम्मू। पाकिस्तान में भारतीय सेना ने आतंकी कैंपों और मुख्यालयों को तबाह कर हर जख्म का बदला लिया है। खासकर, जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमलों का। बीते एक दशक में हुए हर बड़े हमले की साजिश पीओके और पाकिस्तान में चल रहे लश्कर-ए-ताइबा और जैश-ए-मोहम्मद के कैंपों से रची गई।
इसमें 357 नागरिकाें की जान गई और 575 जवान बलिदान हो गए। भारतीय सेना के पूर्व मेजर जनरल गोवर्धन सिंह जम्वाल ने बताया कि जम्मू-कश्मीर को दिए गए हर जख्म सीमा पार से मिले हैं। फिर वह भारतीय सेना को मिले हों या फिर स्थानीय लोगों को। पाकिस्तान में सक्रिय दोनों आतंकी संगठन लगातार घुसपैठ कर हमले कर रहे थे। हर बार हमला करने के बाद मुकर जाते थे। अब हमला करने से पहले 100 बार सोचेंगे।
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रिटायर्ड कर्नल शिव चौधरी के अनुसार भारत की इस कार्रवाई से देश के लोगों में विश्वास पैदा हुआ है कि अब आतंकवाद के जड़ से खत्म होने का वक्त आ गया है। यदि भारत पाकिस्तान में आतंकियों को पनाह देने वालों पर इतनी कार्रवाई कर सकता है तो जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकियों पर भी नकेल कस सकता है।


बीते एक दशक में मारे गए नागरिक, बलिदान हुए जवान
वर्ष नागरिक सुरक्षाबल
2015 19 41
2016 14 88
2017 54 83
2018 86 95
2019 42 78
2020 33 56
2021 36 45
2022 30 30
2023 12 33
2024 31 26
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कब-कब हुए बड़े आतंकी हमले
-2015 : कठुआ के राजबाग पुलिस स्टेशन पर हमला, तीन सुरक्षाकर्मी बलिदान और एक नागरिक की मौत
-2016 : उड़ी हमला, 19 जवान बलिदान
-2016 : नगरोटा सैन्य कैंप, सात सैन्यकर्मी बलिदान
-2018 : जम्मू का सुंजवां सैन्य कैंप, छह सैन्यकर्मी बलिदान, एक नागरिक की मौत
-2019 : पुलवामा हमला, 44 सीआरपीएफ कर्मी बलिदान
-2023 : पुंछ और राजोरी में अलग-अलग हमलों में 15 सैन्यकर्मी बलिदान
-2023 : राजोरी में सात नागरिकों की हत्या
-2024 : रियासी में 10 नागरिकों की हत्या
-2024 : कठुआ और डोडा में 10 सैन्यकर्मी बलिदान
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