नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सेना सात वर्ष बाद फिर पुराना पैंतरा आजमा रही है। भारतीय जवानों को स्नाइपर से निशाना बनाया जा रहा है। एक हफ्ते के भीतर ऐसी दो वारदात सामने आने से सेना सतर्क हो गई है। एलओसी पर तैनात जवानों को एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
दो वर्षों में 30 से अधिक बलिदान
दो वर्षों में 30 से अधिक जवान बलिदान हो गए थे । 2017 में स्नाइपरों के हमलों में एलओसी और बार्डर पर 18 से अधिक जवान बलिदान हो गए। 2018 में भी स्नाइपर हमलों में इतने ही सैन्य अफसरों समेत जवान बलिदान हुए। 11 नवंबर 2018 को नौशेरा में जवान शहीद हुआ। 21 दिसंबर 2018 कुपवाड़ा में दो सैन्य अफसर शहीद हो गए। 26 नवंबर 2018 कुपवाड़ा में सैन्य जवान घायल हो गया। 2019 में 15 जनवरी को हीरानगर में बीएसएफ जवान बलिदान हो गया था।
आतंकियों को पाकिस्तानी सेना ने दी स्नाइपर की ट्रेनिंग
जानकारी के अनुसार पाकिस्तानी सेना के कैंपों में लश्कर ए तैयबा के आतंकियों को स्नाइपर की ट्रेनिंग दी जा रही है। आतंकियों के पास यूएसए और ऑस्ट्रिया निर्मित स्नाइपर हैं। पुंछ, राजोरी, कुपवाड़ा, बारामुला की एलओसी, जम्मू, सांबा और कठुआ के बार्डर पर आतंकी घुसपैठ नहीं कर पा रहे। खासकर जम्मू संभाग में आतंकियों की घुसपैठ बहुत कम हुई है। इसे देखते हुए आतंकी पाकिस्तान की फारवर्ड पोस्टों तक पहुंचे हैं। वह पाकिस्तानी सैनिकों के साथ मिलकर भारतीय जवानों को टारगेट कर रहे हैं।