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Jammu : पांच करोड़ के घोटाले में जेएंडके बैंक के पूर्व प्रबंधक सहित 5 गिरफ्तार, निष्क्रिय खातों से किया 'खेला'

Wed, 19 Feb 2025 01:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

वर्ष 2023 में बैंक के जम्मू आंचलिक कार्यालय के पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण प्रभाग के मुख्य प्रबंधक मोहम्मद शकील ने इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई थी। तबसे मामले में जांच चल रही थी।
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demo - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर बैंक में पांच करोड़ रुपये के बहुचर्चित ऋण घोटाले में क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को पूर्व बैंक प्रबंधक सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया हैं। वर्ष 2023 में बैंक के जम्मू आंचलिक कार्यालय के पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण प्रभाग के मुख्य प्रबंधक मोहम्मद शकील ने इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई थी। तबसे मामले में जांच चल रही थी।

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मुख्य प्रबंधक मोहम्मद शकील ने दर्ज कराई गई शिकायत में बताया था कि एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम में संविदा पर तैनात रहे सलीम यूसुफ ने एकीकृत जल प्रबंधन कमेटी के नाम पर जेके बैंक की लसाना सुरनकोट शाखा में बंद पड़े खातों को धोखे से सक्रिय करवा लिया। इन खातों की मदद से उसने अन्य तीन आरोपियों के साथ मिलकर पुंछ जिले के विभिन्न बैंक शाखाओं से पांच करोड़ रुपये के ऋण ले लिए।

क्राइम ब्रांच के प्रवक्ता ने बताया कि आरोपियों ने सांठगांठ से खातों में नाम बदलवाकर फर्जी वेतन प्रमाणपत्र और पुष्टि पत्र जारी करवा दिए। जबकि ऐसे कोई कर्मचारी थे ही नहीं। फर्जी कर्मचारियों ने खुद को सरकारी कर्मचारी बताकर पर्सनल व कार लोन समेत अन्य कर्ज ले लिए। आरोपियों ने मेंढर और मेंढर बस स्टैंड स्थित बैंक शाखा में फर्जी सरकारी खाते भी खोल लिए। इस तरह, जेएंडके बैंक की विभिन्न शाखाओं से धोखाधड़ी से पांच करोड़ रुपये का ऋण हासिल किया, जिससे बैंक को भारी नुकसान हुआ।
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प्रवक्ता ने बताया कि जांच के बाद क्राइम ब्रांच ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें बैंक की राजोरी शाखा के तत्कालीन प्रबंधक (स्केल-दो) जतिंदर सिंह (अब पदावनत) निवासी जम्मू, मोहम्मद कबीर, मोहम्मद जफीर खान और जफर इकबाल निवासी पुंछ और मोहम्मद शकील निवासी राजोरी शामिल हैं।

ऐसे रची साजिश
आरोपियों ने सबसे पहले विभिन्न बैंकों के माध्यम से वाटर शेड समिति के खातों में पैसा जमा कराए। फर्जी दस्तावेज के आधार पर बैंकों को निर्देश दिया गया कि इन खातों में जमा पैसों से उन कर्मचारियों (फर्जी कर्मचारियों) का वेतन जारी किया जाए। बाद में खुद के फर्जी वेतन प्रमाणपत्र बनवाकर उन्होंने जम्मू-कश्मीर बैंक की विभिन्न शाखाओं से पांच करोड़ रुपये के लोन भी जारी करवा लिए।

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