पीओजेके और गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्त किए बिना आतंकवाद के खतरे को नियंत्रित करना असंभव है। पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान के मूल निवासियों को किसी न किसी बहाने से प्रताड़ित करने में लिप्त है। भारत को चीन और पाकिस्तान पर गिलगित-बाल्टिस्तान के अवैध कब्जे को खत्म करने के लिए दबाव बनाना चाहिए ताकि वहां के लोगों को लद्दाख और अन्य भारतीयों की तरह समान नागरिकता का अधिकार मिल सके। यह बात संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद जिनेवा में गैर सरकारी संगठन के प्रतिनिधि जमील मसूद ने कही।
बाकी दुनिया को प्रभावी ढंग से यह बताना चाहिए कि गिलगित-बाल्टिस्तान में चीन और पाकिस्तान की उपस्थिति स्थानीय भाषाओं और संस्कृतियों के लिए हानिकारक है और यह स्थानीय संसाधनों पर सीधा हमला है।
पाकिस्तान ने छलपूर्ण रणनीति से किया कब्जा : डॉ. यशोधन
सेंटर फॉर लद्दाख एंड जम्मू-कश्मीर स्टडीज के अंतरराष्ट्रीय समन्वयक डॉ. यशोधन अगलगांवकर ने ऐतिहासिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कैसे पाकिस्तान ने पीओजेके और गिलगित-बाल्टिस्तान पर जबरदन और अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। उन्होंने कुछ ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन किया और इन क्षेत्रों पर अवैध कब्जा करने के लिए पाकिस्तान की छलपूर्ण रणनीति पर प्रकाश डाला।
पूरी दुनिया को भारत के साथ खड़ा होना चाहिए : प्रो. नरेश
प्रो. नरेश पाधा ने कहा कि चीन और पाकिस्तान दोनों ने गिलगित-बाल्टिस्तान के स्थानीय लोगों का नरसंहार करने और उन्हें अल्पसंख्यक में बदलने के लिए हाथ मिलाया है। उन्होंने कहा कि हालात को देखते हुए गिलगित-बाल्टिस्तान के मूल निवासियों को विनाश से बचाने के लिए पूरी दुनिया को भारत के साथ खड़ा होना चाहिए। दुनिया को गिलगित-बाल्टिस्तान को एक और शिनजियांग या तिब्बत में बदलने नहीं देना चाहिए।