जम्मू कश्मीर समेत आसपास के राज्यों में जैश फिदायीन हमलों को प्राथमिकता से अंजाम दे रहा है। पिछले कई हमलों में फिदायीन हमलावरों की मौजूदगी से इस बात की पुष्टि हुई है। जानकारी के मुताबिक जैश और लश्कर पर गतिविधियों में तेजी लाने का दबाव बनाया जा रहा है।
जम्मू कश्मीर के कठुआ, सांबा और पंजाब के दीनानगर के साथ साथ शनिवार को पठानकोट में एयरफोर्स बेस पर हुए हमले में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की मौजूदगी होने से यह बात साफ हो चुकी है कि अब जैश द्वारा फिदायीन हमलों की रणनीति बनाई है।
इन फिदायीन हमलों का मकसद ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा बलों और अन्य एजेंसियों को नुकसान पहुंचाना है। जम्मू के सांबा और कठुआ में हुए हमलों को अंजाम देने के पीछे जैश के अफजल गुरु स्क्वाड के होने की बात सामने आई थी।
लेकिन इसकी पुष्टि तब हुई जब 25 नवंबर 2015 को कुपवाड़ा जिले की एलओसी से सटे टंगधार सेक्टर में भारी मात्रा में हथियारों से लैस तीन आतंकियों को सेना ने ढेर कर दिया। वे सेना के एक कैंप पर हमले को अंजाम देने के मंसूबे से वहां पहुंचे थे।
इस हमले के पीछे अफजल गुरु स्क्वाड का हाथ
सेना की 15 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने इस हमले के पीछे अफजल गुरु स्क्वाड का हाथ बताया था। मारे गए आतंकियों से बरामद बेग पर आतंकी संगठन जैश के अफजल गुरु स्क्वाड की मार्किंग थी।
जैश द्वारा यह स्क्वाड वर्ष 2001 में संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु के नाम पर बनाया गया है और इसके पीछे एक ही उद्देश्य है जैश द्वारा घाटी के युवाओं को भावात्मक रूप से अपनी ओर आकर्षित कर आतंकवाद में शामिल करना।
इसके अलावा 5 दिसंबर 2014 को उत्तरी कश्मीर के ऊड़ी सेक्टर में मोहरा आर्मी कैंप पर हुए हमले के पीछे भी इसी स्क्वाड का हाथ माना गया। यह सबसे बड़ा फिदायीन हमला था, जिसमें आठ सेना के जवान और तीन जम्मू कश्मीर पुलिस के जवान शहीद हुए थे। इनमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल शामिल थे।
युवाओं को भी अपनी ओर आकर्षित करने की योजना
पुलिस सूत्रों की माने तो लश्कर और जैश घाटी में पिछले कुछ समय से गतिविधियों को अंजाम देने के लिए साझी रणनीति बना रहे हैं। अब यह युवाओं को भी अपनी ओर आकर्षित करने के लिए नए हथकंडे अपना रहे हैं, लेकिन पुलिस इनके मंसूबों को नाकाम करने की कोशिश में लगी है।
पिछले कई महीनों के दौरान बड़े आतंकी कमांडरों के मारे जाने के बाद से पाकिस्तान में बैठे आतंकी आकाओं का दबाव लश्कर, जैश और हिज्ब पर गतिविधियों को अंजाम देने को लेकर है ताकि आतंकी अपनी मौजूदगी दिखा सकें।
गौरतलब है कि खुफिया एजेंसियों को यह जानकारी भी मिली थी कि पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर में लश्कर, जैश और हिज्ब के कमांडरों के साथ एक बैठक बुलाई गई थी, जिसमें ज्यादा से ज्यादा आतंकियों को पीओके में स्थित लांचिंग पैड से भारत में दाखिल करवाए जाने पर जोर दिया गया।
जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन 31 जनवरी 2000 में मौलाना मसूद अजहर द्वारा कराची में शुरू किया गया। अजहर को 31 दिसंबर 1999 को इंडियन एयरलाइन्स का प्लेन हाईजैक करके छुड़ाया गया था। इससे पूर्व अजहर आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन का सदस्य था।
2015 में जैश से संबंधित घटनाएं
* जनवरी 15- दक्षिणी कश्मीर के केलर इलाके के गाडरू जंगल क्षेत्र में पांच जैश के आतंकियों को सेना द्वारा एक मुठभेड़ में ढेर किया गया। मारे गए आतंकियों में से एक जैश कमांडर मोहम्मद तोइब था जो पाकिस्तान मुल्तान का रहने वाला था जबकि बाकी के चार स्थानीय आतंकी थे।
* मार्च 20- जम्मू संभाग के कठुआ जिले के राजबाग पुलिस थाने पर सेना की वर्दी में फिदायीन हमला हुआ, जिसमें तीन जवान शहीद हुए। इसके अलावा एक स्थानीय नागरिक की भी इसमें मौत हुई। जवाबी कार्रवाई में दो आतंकियों को भी ढेर किया गया, जबकि 10 लोग इस हमले में घायल हुए थे।
* मार्च 21- दो आतंकियों ने जम्मू संभाग के सांबा जिले में सेना के एक कैंप पर हमला किया। सुरक्षा बलों ने दोनों को ढेर कर दिया।
* जुलाई 27- दस लोगों सहित एक एसपी उस समय शहीद हो गए जब हथियारों से लैस तीन आतंकियों ने गुरदासपुर के दीना नगर थाने पर धावा बोला। मरने वालों में तीन आतंकी, तीन स्थानीय नागरिक और चार पुलिस कर्मी थे।
* अक्टूबर 4- दक्षिणी कश्मीर के हारी परिगाम ट्त्राल में जैश के दो विदेशी आतंकियों को सेना ने मुठभेड़ के दौरान ढेर किया। इनकी पहचान आदिल पठान और बर्मी के तौर पर हुई थी।
* नवंबर 25- उत्तरी कश्मीर के टंगधार में सेना के कैंप पर हुए आत्मघाती हमले में एक स्थानीय नागरिक की मौत हुई, जबकि तीन आतंकियों को सेना द्वारा ढेर किया गया।