फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

#UriAttack: आतंकियों के पास मिले पाक निर्मित सामान, जैश ने रची साजिश

Wed, 21 Sep 2016 12:49 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
विज्ञापन
हमले के दौरान मोर्चा संभाले जवान - फोटो : AP
विज्ञापन
उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के उड़ी में सेना के 12 ब्रिगेड मुख्यालय पर जैश-ए-मोहम्मद के फिदायीन हमले में 17 जवान शहीद हो गए। 19 जवान गंभीर रूप से जख्मी हैं। हमला सुबह लगभग चार बजे हुआ। सेना ने चार घंटे में ही चारों आतंकियों को मार गिराया। ये सभी पाकिस्तानी थे। उनके पास से पाकिस्तानी सामान भी बरामद हुआ है। 
विज्ञापन


भारतीय सेना के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन (डीजीएमओ) लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने हमले के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए कहा कि शुरुआती जांच में आतंकियों के जैश ए मोहम्मद से जुड़े होने के संकेत मिले हैं । ये सभी आतंकी विदेशी थे जिनके पास से पाकिस्तान में बने सामान बरामद हुए हैं ।

भारत ने पाकिस्तान के डीजीएमओ को हमले की जानकारी दी है। डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने बताया कि मारे गये आतंकियों के पास से 4 एके-47 राइफल और ग्रेनेड लांचर बरामद किए गये हैं ।
विज्ञापन


सिंह ने ये भी कहा कि आतंकियों ने उन हथियारों से हमला किया है जिनसे जल्दी आग पकड़ ले। इसी कारण सेना के टेंट में आग लग गई और इसी आग से सेना के जवान शहीद हो गये । डीजीएमओ ने कहा कि सेना हर साजिश का सामना करने के लिए तैयार है और ऐसे हमलों का पूरी सख्ती से जवाब दिया जायेगा । 

घाटी में 26 सालों में सबसे बड़ा हमला

उड़ी हमले के दौरान तैनात सेना का जवान - फोटो : AP
रक्षामंत्री मनोहर परिकर और सेनाध्यक्ष दलवीर सिंह सुहाग कश्मीर पहुंच गए हैं।  कश्मीर में 26 सालों में यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है।

हमला उस समय हुआ जब डोगरा रेजीमेंट के जवान ड्यूटी की अदला-बदली की प्रक्रिया में थे। ड्यूटी खत्म करके लौटे जवान तंबुओं में सो रहे थे। अत्याधुनिक हथियारों और आग फैलाने वाले ग्रेनेडों से लैस प्रशिक्षित आतंकियों ने कैंप में पीछे से घुसकर एडमिनेस्ट्रिेटिव ब्लाक को निशाना बनाया।

आतंकियों द्वारा किए गए धमाकों से तंबू में लगी आग मौतों का मुख्य कारण बनी। आतंकियों से निपटने के लिए पैरा कमांडोज को हेलीकाप्टर से कैंप में उतारा गया। मानवरहित विमानों से पूरे इलाके को खंगाला गया। इसी इलाके में 5 दिसंबर 2014 को मोहरा कैंप पर हुए हमले में 10 जवान शहीद हो गए थे। 

माना जा रहा है कि हमलावरों को कैंप के नक्शे और गतिविधियों के बारे में पूरी जानकारी थी। उन्हें इस हमले के लिए विशेष ट्रेनिंग दी गई थी। ये आतंकी झेलम नदी के पास सलमाबाद नाले को पार कर अपने टारगेट तक पहुंचे। नियंत्रण रेखा पर स्थित इस कैंप को इसलिए भी निशाना बनाया गया क्योंकि यहां हथियारों का बड़ा जखीरा रहता है।
विज्ञापन

गृहमंत्री ने नई दिल्ली में की उच्च स्तरीय बैठक

गृहमंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : PTI
हमले की खबर मिलते ही केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अपना विदेश दौरा रद्द कर राज्यपाल एनएन वोहरा और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से बात कर हालात की जानकारी ली।

राजनाथ सिंह के आवास पर हुई उच्च स्तरीय बैठक में हालात की समीक्षा की गई। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल सहित खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों के प्रमुख अधिकारी मौजूद थे। सेनाध्यक्ष जनरल दलवीर सिंह सुहाग ने मौके पर पहुंचकर सैन्य अफसरों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने जख्मी जवानों से भी मुलाकात की। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें