यह रोपवे विशेष रूप से बुजुर्ग श्रद्धालुओं और उन लोगों के लिए लाभकारी होगा, जो शारीरिक सीमाओं या हेलीकॉप्टर सेवाओं की सीमित क्षमता के कारण कठिन यात्रा पूरी नहीं कर सकते," गर्ग ने कहा। बोर्ड ने इस परियोजना के कार्यान्वयन के दौरान स्थानीय हितधारकों की चिंताओं को भी ध्यान में रखने की बात की।
हम सभी की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें स्थानीय लोगों को भी शामिल किया जाएगा ताकि यात्रा को और अधिक सुगम और समावेशी बनाया जा सके गर्ग ने आश्वासन दिया। निर्णय लेने के बाद बोर्ड अधिकारियों के अनुसार जल्द ही इस परियोजना के कार्य शुरू कर देगा ताकि इस पवित्र यात्रा को सभी श्रद्धालुओं के लिए सुलभ बनाया जा सके।
अधिकारियों के मुताबिक रोपवे तारकोट मार्ग को भवन यानी मुख्य मंदिर क्षेत्र से जोड़ेगा। पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव डालने के लिए सावधानीपूर्वक योजना बनाई जाएगी और श्रद्धालुओं को त्रिकुटा पहाड़ियों का शानदार दृश्य मिलेगा जो यात्रा के आध्यात्मिक और प्राकृतिक अनुभव को और बेहतर बनाएगा। इस रोपवे से प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं को यात्रा करने में मदद मिलेगी जिससे पारंपरिक ट्रैकिंग मार्ग पर होने वाली भीड़-भाड़ में कमी आएगी। अधिकारियों का कहना है कि यात्रा का समय घंटों के बजाय कुछ मिनटों में सिमट जाएगा।