जीएमसी के अधीन पहले सरकारी फार्मेसी कालेज की कवायद तेज कर दी गई है। कालेज के प्रोजेक्ट को 12वीं पंचवर्षीय योजना में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। पहले चरण में कालेज में 60 सीटें होंगी। कालेज के निर्माण पर प्रस्तावित 45 करोड़ रुपया खर्च आएगा।
इसके खुलने पर स्थानीय विद्यार्थियों को फार्मेसी के अध्ययन के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। जीएमसी के प्रिंसिपल डा. घनश्याम देव गुप्ता के अनुसार केंद्र सरकार को प्रोजेक्ट भेजा गया है। उम्मीद है इसे योजना में शामिल कर लिया जाएगा। फार्मेसी में चार साल का कोर्स होगा।
इसमें फार्मेसी शोध, ड्रग विभाग, फार्माटिकल आदि क्षेत्रों में स्थानीय विद्यार्थियों को यही पर शिक्षा मिल सकेगी। अभी तक संभाग के दस जिलों पर ऐसा कोई सरकारी कालेज काम नहीं कर रहा है। प्रस्तावित प्रोजेक्ट में पहले चरण में तीन सौ वर्ग मीटर जमीन पर दो कक्षाओं का निर्माण किया जाएगा।
इसी तरह करीब एक हजार वर्ग मीटर पर लेबोरेटरी का काम होगा। प्रशासनिक क्षेत्र के लिए करीब 90 वर्ग मीटर पर निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा अन्य निर्माणों के लिए 3400 वर्ग मीटर क्षेत्र में काम किया जाएगा। प्रोजेक्ट को पहले राज्य के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा आयुक्त सचिव के पास भेजा गया, जिसे बाद में केंद्र सरकार को भेजा गया। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012-17 तक पंचवर्षीय योजना लागू है।