महबूबा मुफ्ती ने भारत में बढ़ती असुरक्षा, बेरोजगारी, और धार्मिक असहिष्णुता पर चिंता जताई, साथ ही चुनाव परिणामों और बांग्लादेश से तुलना करते हुए सवाल उठाए।
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने जम्मू और कश्मीर में बढ़ती असुरक्षा और बेरोजगारी पर चिंता जताते हुए कहा कि आज के युवाओं को रोजगार की बात की जाती है, लेकिन उन्हें नौकरी नहीं मिलती। महबूबा मुफ्ती ने स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और सड़कों की हालत पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सरकार इन महत्वपूर्ण मुद्दों को सुधारने के बजाय मस्जिदों को तोड़ने की कोशिश कर रही है, ताकि वहां मंदिर बनाया जा सके।
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उन्होंने हाल ही में सम्भल में हुए घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि कुछ लोग दुकानों पर काम कर रहे थे और उन्हें गोली मार दी गई। महबूबा ने अजमेर शरीफ दरगाह का उदाहरण देते हुए कहा कि यह भाईचारे का सबसे बड़ा प्रतीक है, जहां सभी धर्मो के लोग एक साथ प्रार्थना करते हैं, लेकिन अब इसे भी खंगालने की कोशिश की जा रही है, ताकि वहां भी मंदिर की खोज की जा सके।
महबूबा ने चुनाव परिणामों पर भी संदेह व्यक्त किया और कहा कि वोटिंग प्रतिशत और चुनाव परिणामों में अंतर है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए एक राज्य को छोड़ दिया गया था। महबूबा ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों की ओर इशारा करते हुए सवाल किया कि यदि भारत में भी अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किए जाएंगे तो भारत और बांग्लादेश में क्या फर्क रहेगा। मुझे भारत और बांग्लादेश में कोई फर्क नहीं दिखता।