मुफ्ती सरकार ने अलगाववादी मसर्रत आलम की रिहाई के मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय को दोबारा रिपोर्ट भेज दी है। पहली रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर सफाई मांगी थी।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मुफ्ती सरकार की दूसरी रिपोर्ट पर भी असंतोष जताते हुए कुछ नए बिन्दुओं पर स्पष्टीकरण तलब किया है। पहले गृह मंत्रालय ने यह जानना चाहा था कि जिस व्यक्ति को चार साल से सुरक्षा के लिए खतरा समझा जा रहा था उसे एक सप्ताह में किस आधार पर रिहा कर दिया गया।
मुफ्ती सरकार ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि मसर्रत की रिहाई का फैसला एक माह पहले ही राज्यपाल शासन के दौरान हो चुका था। मसर्रत को सभी मामलों में जमानत मिल चुकी थी।
पीएसए (पब्लिक सेफ्टी एक्ट) का कोई नया मामला उस पर नहीं बना था। सुप्रीम कोर्ट का दिशा-निर्देश है कि किसी व्यक्ति को एक ही मामले में बार-बार जेल में रोका नहीं जा सकता। मुफ्ती सरकार ने मसर्रत की दोबारा गिरफ्तारी पर भी लाचारी जताई है।