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कश्मीर घाटी में 22 सोशल नेटवर्किंग साइटें एक महीने के लिए बैन,राज्य सरकार ने लिया फैसला

Thu, 27 Apr 2017 07:19 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/श्रीनगर
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की मुलाकात के बाद कश्मीर में हिंसा पर काबू पाने के प्रयास तेज हो गए हैं। महबूबा ने एक दिन पहले यूनिफाइड कमांड की बैठक में सुरक्षा बलों को संयम की नसीहत दी थी और अब सरकार ने अफवाहों पर ब्रेक लगाने के लिए कश्मीर में 22 सोशल नेटवर्किंग साइट पर एक माह के लिए प्रतिबंध लगा दिया है।
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गृह विभाग ने आदेश जारी कर इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों को सोशल मीडिया की साइट पर रोक लगाने को कहा है। उपद्रवी तत्व सोशल मीडिया के सहारे अफवाहें फैलाकर हिंसा भड़का रहे थे। इस आदेश के बाद अब कश्मीर में यू ट्यूब पर भी कुछ अपलोड नहीं हो सकेगा। 

गौरतलब है कि आतंकी संगठनों, कुछ सियासी कार्यकर्ता, पत्थरबाजों और उपद्रवियों द्वारा कई वीडियो वायरल किए जा रहे थे। इस कारण उपद्रव, पत्थरबाजी और हिंसा पर अंकुश लाना मुश्किल हो रहा था। कश्मीर में सोशल मीडिया पर होने वाले देश विरोधी और सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ दुष्प्रचार पर गृह विभाग ने कड़ा संज्ञान लेते हुए इस आशय का फैसला लिया है। अब 22 नेटवर्किंग साइट पर उपभोक्ता मैसेज के साथ कुछ भी अपलोड नहीं कर सकेंगे।
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इस आदेश से पहले फेसबुक और व्हाट्सएप पर भारतीय सेना के खिलाफ लगातार वीडियो अपलोड हो रहे थे। आतंकियों के वीडियो तक अपलोड हो रहे थे। गृह विभाग ने इंडियन टेलीग्राफ एक्ट और सूचना तकनीकी एक्ट के तहत प्रतिबंध लगाया है। 

इन सोशल साइट पर लगी रोक
 सरकार के फैसले के बाद फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर, क्यू क्यू, वीचैट, क्यूजोन, टूंबिर, गूगल प्लस, बैडू, स्काइप, लाइन, वायवर, स्नैपचैट, पिंटरेस्ट, टेलीग्राम, रेडिट, स्नैपफिश, यू ट्यूब अपलोड, वाइन, जैंगा, बजनेट और फ्लिकर साइटों पर रोक लग गई है। 

इंस्टेट मैसेजिंग सर्विस, फेसबुक और ट्विटर भी बंद 
मोबाइल कंपनियों पर इंस्टेट मैसेजिंग सर्विस भी बंद रहेगी। आदेश में कहा गया कि कश्मीर में फेसबुक और ट्विटर का भी गलत उपयोग हो रहा था। शरारती तत्व इसके दुरुपयोग से जन सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे थे। सरकार और सुरक्षा बलों के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा था। 
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सोशल मीडिया पर भी गुमराह हो रहे कश्मीर घाटी के युवा

facebook - फोटो : Demo Photo
कश्मीर घाटी में पत्थरबाज सेना के लिए मुश्किलें पैदा कर ही रहे हैं, साथ ही सोशल मीडिया पर भी अनर्गल प्रचार कर युवाओं को गुमराह किया जा रहा है।

शांति की चाह रखने वाली अवाम के लिए ये परेशानी का सबब बने हुए हैं। तथाकथित ‘आजादी’ के नाम पर उनकी पत्थरबाजी सोशल साइटों पर खूब चल रही है। ‘स्टोन पेल्टर’ और ‘संगबाज’ जैसे नामों से सैकड़ों प्रोफाइल बनाकर ऐसे लोग अपने लिए समर्थन जुटाने का काम कर रहे हैं। प्रोफाइल पिक में भी पत्थरबाजी की ही फोटो अपलोड हैं। इनका संदेश बस लड़ाई है।

फर्जी प्रोफाइल भी सैकड़ों की संख्या में बनी हैं। कुछ तो बाकायदा ‘कश्मीरी स्टोन पेल्टर’ के नाम पर हैं। सोशल मीडिया की संवेदनशीलता को देखते हुए घाटी में भले ही इंटरनेट ठप कर दिया गया हो, लेकिन इससे पत्थरबाज बाज नहीं आ रहे। वह दूसरी जगहों से अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। इनमें कुछ की प्रोफाइल में बाकायदा पड़ोसी देश पाकिस्तान का झंडा लगा है और स्टेटस में हिंदुस्तानियों के लिए गलत शब्दों का प्रयोग बताता है कि प्रोफाइल सीमा पार से बनाई गई हैं। 

खुद को बड़े गर्व से स्टोन पेल्टर बताते युवा कुछ साइटों पर उर्दू तो कुछ में हिंदी में संदेशों का प्रचार कर रहे हैं। यहां तक कि विदेश के नाम पर भी प्रोफाइल बनी हुई हैं। कश्मीर की आजादी के नाम से यह फर्जी प्रोफाइल युवाओं को जन्मभूमि के नाम पर भड़काने, उनसे संपर्क करने और जिहाद केनाम पर आगे आने केलिए भड़काने का काम कर रही हैं।
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