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J&K: 28 दिन के बेटे और आठ माह की बेटी के सिर से उठा पिता का साया, भद्रवाह में तीन दोस्तों के दुख भरे आखिरी दिन

Fri, 03 Jan 2025 03:34 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

भद्रवाह में तीन दोस्तों मुकेश, सनी और आशुतोष की मौत से उनके परिवारों में शोक की लहर, मुकेश अपने 28 दिन के बेटे का चेहरा नहीं देख पाया था।

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मृतक मुकेश, सनी, आशुतोष - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तीनों दोस्तों के परिवार का हाल देख हर किसी की आंख नम थीं। आशुतोष की अभी शादी नहीं हुई थी। मुकेश के 28 दिन का बेटा है और सनी की बेटी की उम्र आठ माह है। वह टेलर था और घर में ही दुकान थी। उसकी छह साल की एक और बेटी माहिरा है, जो पहली कक्षा में पढ़ती है। 28 दिन पहले एक बेटा हुआ है।

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पंडित ने कहा था कि गंथमूल की पूजा के बाद ही वह बेटे का मुंह देख सकेगा।उसकी पत्नी रो-रोकर बस यही एक बात दोहराए जा रही थी। वहीं, मुकेश की दो बड़ी बहनें ज्योति व मोना भी भाई का शव देख एकदम टूट सी गई थीं। मोना बार-बार कह रही थीं कि मैंने कहा था कि मत जाओ, पर उसने नहीं मानी मेरी बात।

मृतक सनी चौधरी पुलिस में बतौर एसपीओ कार्यरत था। वह एक जज के साथ तैनात था। वह तीन बहनों का दुलारा और इकलौता भाई था। सनी चौधरी के पिता पुलिस विभाग से एएसआई पद से रिटायर हुए हैं। उसकी तीन साल पहले वर्षा से शादी हुई थी।उसके एक आठ महीने की बच्ची सारिका है। बहन को संभाल रहे सनी के जीजा गुरदास चौधरी ने बताया कि सनी मेरा साला नहीं मेरे भाई की तरह था। अपनी हर बात मुझे बताता था। इस बार मुझे बताए बिना ही चला गया। भांजी को गोद में लिए कहा कि इसके सिर से तो पिता का साया उठ गया।

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सबसे छोटा था आशुतोष
आशुतोष की अपनी पुरखु में पैथोलॉजिस्ट है। घरवालों के मुताबिक, वह अपनी कार स्विफ्ट लेकर भद्रवाह गया था। उसके पिता पुलिस विभाग से एएसआई के पद से रिटायर्ड हुए हैं। आशुतोष की एक बड़ी बहन और एक बड़ा भाई भी है। दोनों की शादी हो चुकी है। बताया जा रहा है कि आशुतोष ने रात को उठकर दरवाजा खोलने की कोशिश की होगी। अंधेरा होने के कारण बाथरूम का दरवाजा खुल गया और आशुतोष वही पर गिर गया होगा। आशुतोष की अभी शादी नहीं हुई थी। 
 

अपने बेटे का मुंह नहीं देख पाया मुकेश 
मुकेश सिंह दर्जी का काम करता था। उसने घर में ही बुटीक खोली है। वहीं पर कपड़े सिलकर परिवार का पेट भरता था। साढ़े तीन साल पहले ही मुकेश की माता की मौत हो चुकी है। उसकी छह साल की बेटी माहिरा पहली कक्षा में पढ़ती है। वहीं, एक 28 दिन का बेटा भी है। पंडित ने कहा था कि बेटे के एक महीने होने के बाद उसकी गंथमूल की पूजा होगी।

इसके बाद ही मुकेश अपने बेटे का मुंह देख सकता है। इसलिए उसने अभी तक अपने बेटे का मुंह नहीं देखा था। उसका बड़ा भाई रिंकू किराना की दुकान चलाता है। और अपने परिवार के साथ अलग रहता है। मुकेश की दो बड़ी बहनें ज्योति और मोना का रो-रो कर भूरा हाल था। मोना ने कहा कि बोला था मत जाओ पर तुमने मेरी बात नहीं मानी, मेरा सबसे प्यार भाई था तू। वो बच्चा जो पिता का मुंह नहीं देख पाएगा उस बच्चे का क्या होगा। 
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आज हुआ अंतिम संस्कार
शुक्रवार सुबह 9 बजे मुकेश सिंह और सनी चौधरी का अंतिम संस्कार पुरखु में हुआ। वहीं, आशुतोष का अंतिम संस्कार शुक्रवार सुबह 8 बजे पुरमंडल में किया गया ।
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