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J&k: जयशंकर की इस्लामाबाद यात्रा पर फारूक अब्दुल्ला ने जताई खुशी, 'भारत-पाकिस्तान के बीच तल्खी होगी कम'

Sat, 05 Oct 2024 05:37 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर की पाकिस्तान यात्रा का स्वागत किया, उम्मीद जताई कि यह दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने में मदद करेगा।
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फारूक अब्दुल्ला - फोटो : एजेंसी
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विस्तार
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नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को उम्मीद जताई कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर की इस्लामाबाद यात्रा, जो शांगहाई सहयोग संगठन (शंघाई सहयोग संगठन) की बैठक के लिए होने वाली है, भारत और पाकिस्तान के बीच बेहतर संबंधों की शुरुआत करेगी।
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भारत सरकार ने शुक्रवार को घोषणा की कि जयशंकर मध्य अक्टूबर में पाकिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन में भाग लेंगे। यह लगभग नौ वर्षों में पहली बार है जब भारत के विदेश मंत्री पाकिस्तान का दौरा करेंगे, जबकि दोनों पड़ोसी देशों के बीच कश्मीर मुद्दे और पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद के कारण रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं।

पाकिस्तान 15 और 16 अक्टूबर को शंघाई सहयोग संगठन के प्रमुखों की बैठक की मे होस्टिंग कर रहा है। अब्दुल्ला ने संवाददाताओं से कहा, मुझे उम्मीद है कि वे हर मुद्दे पर चर्चा करने में सक्षम होंगे। आर्थिक मुद्दे हमारे लिए और पूरी दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। और मुझे यकीन है कि वे द्विपक्षीय मामलों पर भी बात करेंगे।
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उन्होंने कहा, मुझे उम्मीद है कि वे दोस्ताना रहेंगे और दो देशों के बीच बेहतर समझ बनाने की कोशिश करेंगे। मेरे सभी के लिए शुभकामनाएं। जब उनसे पूछा गया कि क्या पड़ोसी देशों के बीच मतभेदों के समाधान की कोई संभावना है, तो अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि यह बैठक दोनों देशों के बीच बेहतर संबंधों की शुरुआत कर सकती है।

अब्दुल्ला ने कहा, मुझे ऐसा उम्मीद है। कोई नहीं कह सकता कि वहां क्या होगा। लेकिन, मैं आशा करता हूं और प्रार्थना करता हूं कि दुश्मनियां समाप्त हों और दोनों देशों के बीच बेहतर संबंधों की शुरुआत हो।

इससे पहले, भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में सुधार के लिए कई प्रयास किए गए हैं, लेकिन विवादास्पद मुद्दों के कारण यह हमेशा कठिनाइयों का सामना करता रहा है। अब्दुल्ला की इस आशा से यह स्पष्ट होता है कि वे बेहतर रिश्तों के लिए तत्पर हैं और आशा करते हैं कि शंघाई सहयोग संगठन की बैठक इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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