विशेष अदालत ने दिसंबर 2020 में दो ग्रेनेड के साथ गिरफ्तार किए गए लश्कर के संदिग्ध आतंकी को डिफाल्ट जमानत दे दी है। अभियोजन की दलीलों पर अदालत ने यह तो स्वीकार किया कि आरोपी के खिलाफ आतंकी होने के सुबूत हैं, लेकिन जांच पूरी कर 180 दिन के भीतर चालान पेश करना अनिवार्य है।
अभियोजन इसमें विफल रहा है, जिसे देखते हुए आरोपी मोहम्मद अशरफ निवासी गांव लार तहसील माहौर रियासी को डिफाल्ट जमानत दी जाती है। आरोपी गिरफ्तारी के समय जम्मू के सुंजवां में पीर बाग कॉलोनी में रह रहा था।
पुलिस के अनुसार जम्मू में राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास पर लश्कर के आतंकी को गिरफ्तार किया गया था। उससे दो हथगोले बरामद किए गए। उसका मकसद लश्कर का नेटवर्क खड़ा करने और जम्मू शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में ग्रेनेड हमला करना था। पुलिस ने हाईवे बाईपास रोड पर जांच के दौरान उसे गिरफ्तार किया था। एसडीपीओ नार्थ जम्मू ने कोर्ट में आरोपी की हिरासत बढ़ाने की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने कहा कि आरोपी बेहद संगीन मामले में शामिल है।
दलीलें सुनकर अदालत यह भी मानती है कि आरोपी ने देश की संप्रभुता के खिलाफ अपराध किया है, लेकिन सामान्य धाराओं में 90 दिन व यूएपीए की धाराओं को मिलाकर अधिकतम 180 दिन में चालान पेश करना जरूरी है, जिसमें अभियोजन विफल रहा। आरोपी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके की शर्त पर जमानत दी जाती है। वह अदालत की इजाजत के बिना जम्मू-कश्मीर से बाहर नहीं जा सकता है। जेएनएफ