आईपीएस बाली 1996 में रिटायर हो गए। उनके रिटारयरमेंट के बाद 1997 में हाईकोर्ट के आदेश पर उनकी एसएसपी के चयन ग्रेड में पदोन्नति को मंजूरी दी गई। इसे 1993 से प्रभावी माना गया। पर उन्हें पदोन्नति के हिसाब से मिलने वाले लाभ नहीं प्रदान किए गए। 2011 में उन्होंने फिर से हाईकोर्ट की शरण ली।
इसी मामले पर फैसला सुनाते हुए कैट कहा कि आईपीएस बाली 1991 में ही आईपीएस कैडर में पदोन्नति पाने के योग्य हो गए थे। हालांकि विभाग ने उन्हें नजरअंदाज करते हुए उनके कनिष्ठ अधिकारियों को कैडर में पदोन्नति दे दी। इसी के साथ कैट ने नौ साल की सेना की नौकरी का लाभ देते हुए पदोन्नति पर फिर से विचार करने का आदेश दिया है। साथ ही पात्र पाए जाने पर पदोन्नति के साथ वेतन और पेंशन का बकाया भुगतान करने का आदेश दिया है।
न्याय के साथ मान-सम्मान के लिए लड़ी लड़ाई: आईपीएस बालीआईपीएस बाली ने बताया कि पूरी लड़ाई उनके हक और मान-सम्मान की थी। विभाग के उच्च अधिकारियों ने अनबन की वजह से लगातार कनिष्ठ अधिकारियों को उनसे ऊंचे पदों पर तैनाती दी। उन्होंने आगे बताया कि मैंने पूरी ईमानदारी से नौकरी की, फिर भी अधिकारियों ने मेरे साथ भेदभाव किया।
विभागीय स्तर पर जब कहीं भी सुनवाई नहीं हुई तो मैंने भी ठान लिया कि आखिरी सांस तक न्याय के लिए लड़ाई लडूंगा। कैट के फैसले से फिलहाल मैं संतुष्ट हूं, लेकिन इसके बाद भी न्याय मिलने में देरी हुई तो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाऊंगा।