कई दशक बाद कश्मीर के स्थानीय आतंकियों का फिदायीन दस्ते में फिर शामिल होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता और चुनौती बन रहा है। सुरक्षा एजेंसियां भी मानती हैं कि अगर ऐसा ही आगे चला तो आने वाला समय चुनौती भरा रहेगा। आतंकियों द्वारा इस्तेमाल हथियार भी काफी प्रभावशाली माने जा रहे हैं।
पुलवामा जिले के लेथपोरा सीआरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर पर फिदायीन हमले में एक चौंका देने वाली बात सामने आई है। कई दशकों के बाद फिदायीन दस्ते में स्थानीय कश्मीरी आतंकियों का पाया जाना चिंता का विषय है।
लेथपोरा कैंप पर फिदायीन हमले को अंजाम देने वाले दस्ते में दो स्थानीय आतंकी थे, जिनमें से एक पुलिसकर्मी का नाबालिग बेटा भी था और हिज्ब कमांडर बुरहान वानी वाले त्राल इलाके का रहने वाला था।
सबसे अधिक चौंका देने वाली बात यह है कि हमले से पूर्व नाबालिग ने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें वह युवाओं आतंकवाद की राह पर आने की अपील कर रहा था। सुरक्षा एजेंसियां का भी यह मानना है कि यह वीडियो युवाओं के लिए आतंकवाद में शामिल होने के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।
गौरतलब है कि रविवार तड़के लेथपोरा ट्रेनिंग सेंटर पर हुए फिदायीन हमले में जैश के तीन आतंकियों में से दो अंदर घुसे, जिन्हें फरदीन द्वारा काफी देर तक कवर फायर दिया गया। सूत्रों के अनुसार सीआरपीएफ का एक जवान बुलेट प्रूफ जैकेट को चीरती हुई गोली के कारण मारा गया।
इसे लेकर सुरक्षा एजेंसियां बात मान चुकी हैं कि जो हथियार आतंकी इस्तेमाल कर रहे हैं, वह काफी प्रभावशाली हैं।