रियासत के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला
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पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद डा. फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि कश्मीर में लगातार खराब होते जा रहे हालात में सुधार लाने के लिए तत्काल राज्यपाल शासन को लागू करने की जरूरत है। फारूक ने कहा कि राज्यपाल शासन का नेशनल कांफ्रेंस ने विरोध किया था और इसे बढ़ावा देने का भी कोई इरादा नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात में राज्यपाल शासन के अलावा और कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाल ही में उन्होंने नई दिल्ली में मुलाकात की और पाया कि प्रधानमंत्री कश्मीर में जारी स्थिति का शांतिपूर्ण अंत चाहते हैं। फारूक का कहना है कि महबूबा मुफ्ती सरकार हर क्षेत्र में नाकाम रही है। केवल दक्षिण कश्मीर ही नहीं, पूरे कश्मीर में समस्या पैदा हो गई है। इस तरह के हालात से देश के अन्य हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने का भी खतरा है। ऐसे में जितनी जल्दी इस समस्या पर नियंत्रण पाया जाए उतना ही ठीक रहेगा।
उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी में पिछले कई महीनों से बनी खराब कानून व्यवस्था की स्थिति से कश्मीर घाटी अराजकता की तरफ बढ़ रही है। उन्होंने भाजपा नेताओं से कहा कि वह कश्मीर को लेकर कड़े बयान देने से परहेज करें। जब प्रधानमंत्री शांति चाहते हैं तो अन्य को यह समझना चाहिए। कहा कि मुख्यमंत्री को उसी दिन त्यागपत्र दे देना चाहिए था जब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को लिखकर दिया कि वह अलगाववादियों से बातचीत नहीं करेगी। महबूबा मुफ्ती लगातार सभी हितधारकों से बातचीत करने पर जोर दे रही थी।