अधिकारी के अनुसार आईएसआई घाटी में सुरक्षाबलों से बचने के लिए स्लीपर सेल तैयार करती थी। सुरक्षा एजेंसियों ने स्थानीय लोगों से मिले खुफिया इनपुट के बाद कई मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। उन्होंने कहा कि दोनों को बाद में प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) में भर्ती किया गया, जहां दोनों पाकिस्तानी मूल के बुरहान हमजा से आदेश के साथ ही धार्मिक शिक्षा भी हासिल करते थे।
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अधिकारी ने कहा कि दक्षिण कश्मीर में ही 40 ऐसे मामले थे जिनमें भर्ती के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया गया था। नई भर्ती के लिए सीमा पार से आदेश के इंतजार थे। अधिकारी ने कहा कि निश्चित तौर पर आतंकी संगठन हथियारों की कमी से जूझ रहे हैं। यही कारण है कि अब पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन मैनपॉवर के स्थान पर हथियार भेजने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने जम्मू शहर के बाहरी क्षेत्र में हुई मुठभेड़ का भी जिक्र किया कि जिसमें चार आतंकियों का समूह 11 असॉल्ट राइफल और भारी मात्रा में गोला बारूद लेकर जा रहा था।