नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता और वित्त मंत्री कांग्रेस की दोतरफा नीतियों से काफी खफा नजर आए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रो. सैफुद्दीन सोज द्वारा बाढ़ आपदा में सरकार के विफल रहने की बात कहने पर राथर ने कहा कि क्या वे सरकार का अंग नहीं हैं।
जब रियासत में नेकां-कांग्रेस की गठबंधन सरकार चल रही है, तो कांग्रेस अपनी जिम्मेदारी को दूसरों पर डालकर अवाम की नजरों में अच्छा बनने की कोशिश कर रही है, लेकिन अवाम सब जानती है। राथर ने कहा कि उनका सचिवालय बाढ़ में डूब गया, मंत्रियों के कार्यालय जलमग्न हो गए। ऐसे में भी मुख्यमंत्री बिना कार्यालय और स्टाफ के दिनरात लगे रहे। फिर भी हमारे साथी आलोचना कर रहे हैं।
नेशनल कांफ्रेंस के चुनाव से भागने की चर्चाओं पर राथर ने कहा कि पूरी रियासत के लोग बाढ़ से परेशान हैं। ऐसे में उनके सामने चुनाव नहीं, बल्कि उनका पुनर्वास और उनकी मदद करना पहली प्राथमिकता है। नेकां इस समय चुनाव नहीं चाहती। इसके बावजूद यदि निर्वाचन आयोग चुनाव करवाता है, तो हम चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हम जम्हूरियत का सम्मान करते हैं और करते रहेंगे।