उड़ी हमले में सुरक्षा में हुई चूक का पता लगाने के लिए सेना ने जांच समिति का गठन किया है। समिति तय समय में जांच पूरी करेगी। साथ ही भविष्य में इस प्रकार के हमलों से बचने के उपायों के बारे में भी सुझाव देगी।
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान आधारित ग्रुप जब घुसपैठ करता है तो उनका पहला निशाना एलओसी पार करने के बाद सबसे पहले उपलब्ध आर्मी कैंप या सुरक्षा प्रतिष्ठान होता है।
समिति को यह सुझाव देने को कहा गया है कि किस प्रकार इन हमलों से बचा जा सकता है। साथ ही सुरक्षा में हुई चूक का भी पता लगाया जाएगा जिसकी वजह से हमले हो सके।
हमले से पहले हुई थी इलाके की रेकी
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इसके साथ ही समिति यह भी निरोधात्मक उपाय सुझाएगी कि एलओसी के करीब सैन्य प्रतिष्ठानों के आसपास फोर्स की तैनाती में क्या बदलाव की जरूरत है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि घटना को अंजाम देने से एक दिन पहले आतंकियों ने इलाके में घुसपैठ की थी।
इलाके की रैकी भी की गई थी। जैश के आतंकियों के एक दिन पहले घुसपैठ करने की आशंका इस तथ्य से प्रबल होती है कि फिदायीनों की दाढ़ी एक दिन से पुरानी नहीं थी, जबकि वे सामान्य तौर पर क्लीन शेव रहते हैं।
फिदायीनों की दाढ़ी से खड़े हुए सवाल के जवाब खोजने के लिए सेना ने अपनी जांच कमेटी को लगा दिया है जो तय सीमा के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी।
रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री को सौंपी रिपोर्ट
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वहीं उड़ी में हुए हमले के बाद से दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठकों का दौर जारी है । बीते दिन श्रीनगर से लौटे रक्षामंत्री मनोहर पार्रिकर ने प्रधानमंत्री को रिपोर्ट सौंपी है । आज सुबह दिल्ली में हुई बैठक में ये तय हुआ कि सरकार अब पाकिस्तान के प्रति अब आक्रामक रुख अख्तियार करेगी ।
सरकार संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को घेरने की तैयारी कर रही है । वही गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी सारी दुनिया के देशों से पाकिस्तान को अलग थलग कर देने की मांग की है ।
गौरतलब है कि उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के उड़ी में सेना के 12 ब्रिगेड मुख्यालय पर हुए जैश-ए-मोहम्मद के फिदायीन हमले में कल 18 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले में 19 जवान गंभीर रूप से जख्मी है जिनका 90 बेस कैंप अस्पताल में इलाज किया जा रहा है।