इससे पहले 20 नवंबर को गृहमंत्री अमित शाह ने संसद के उच्च सदन राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर के हालातों पर विस्तृत जानकारी दी थी। सासंदों के सवालों का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि घाटी में स्थिति सामान्य है और किसी भी हिस्से में कर्फ्यू जैसे हालात नहीं हैं।
वहीं कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने जब कहा कि आज के जमाने में इंटरनेट और स्वास्थ्य की जरूरत ज्यादा है। पड़ोसी देश 1947 से है, हम भी सीएम रहे हैं कुछ ही दिनों के लिए इंटरनेट बंद रहता था लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि साढ़े तीन महीने तक इंटरनेट बंद कर दिया जाए।
इस सवाल का जब अमित शाह जवाब देने लगे तो गुलाम नबी आजाद ने आंकड़ों को लेकर टोका-टिप्पणी की। जिस पर पलटवार करते हुए अमित शाह ने कहा कि अगर गुलाम नबी आजाद इन आंकड़ों को चैलेंज करते हैं तो मैं जिम्मेदारी के साथ बोलता हूं कि सारी जिम्मेदारी मेरी है। आप रिकॉर्ड पर कहिए कि ये आंकड़ा गलत है। इस मसले पर मैं घंटों की चर्चा के लिए भी तैयार हूं।
अमित शाह ने गुलाम नबी आजाद को लेकर राज्यसभा के सभापति वेकैया नायडू को संबोधित करते हुए कहा था कि मैं नहीं चाहता था कि इतिहास में जाऊं लेकिन वो (गुलाम नबी आजाद) मुझे घसीट कर ले जा रहे हैं, अब उन्होंने कहा तो मुझे जवाब देना होगा। अब अगर वो नहीं रुके तो आप (उपराष्ट्रपति) मुझे नहीं रोक सकते, उनको सहा अब मुझे भी सहन कर लीजिए।
गृह मंत्री शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा हटाए जाने के बाद पुलिस की गोली से एक भी व्यक्ति की जान नहीं गई है तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा उपयुक्त स्थिति पाए जाने के बाद वहां जल्द ही इंटरनेट सेवा बहाल कर दी जाएगी।