अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर के बच्चे सीजनल इंफ्लूएंजा (फ्लू) की चपेट में आ रहे हैं। अस्पतालों में पीड़ितों की संख्या में वृद्धि हो रही है। ओपीडी में 40 से 50 प्रतिशत ऐसे मामले पहुंच रहे हैं। बच्चों में शरीर दर्द, सिरदर्द, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, तेज बुखार के बाद निमोनिया की शिकायत हो रही है। कई गंभीर बच्चों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है। अधिकांश बच्चे एक साल की कम उम्र के हैं। विशेषज्ञों के अनुसार फरवरी तक फ्लू का प्रभाव रहता है। इसलिए शारीरिक रूप से कमजोर बच्चों की सेहत पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
शहर के प्रमुख जच्चा बच्चा अस्पताल एसएमजीएस के बाल रोग विभाग के एचओडी डॉ. जीएस सैनी ने बताया कि इंफ्लूएंजा से पीड़ित होने के बाद कई बच्चों में निमोनिया की शिकायत हो रही है। अधिकांश मामलों में लोग बिना डाक्टरी परामर्श के दवाएं दे रहे हैं, जिससे छाती में संक्रमण बढ़ने से तबीयत अधिक खराब हो रही है। फ्लू के बढ़ने का एक कारण बच्चों को आइसोलेट नहीं करना भी है। इस वजह से हवा से वायरल संक्रमण दूसरे बच्चे में प्रवेश कर जाता है। मसलन, अगर कोई बच्चा इंफ्लूएंजा से पीड़ित है और वह सार्वजनिक स्थल, स्कूल आदि जगह जा रहा है तो संपर्क में आने वाले अन्य बच्चे भी पीड़ित हो जाएंगे।
अस्पताल में रोजाना 50 से 60 बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है, जिसमें निमोनिया के 15 से 20 मामले आ रहे हैं। बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए शीघ्र अस्पताल में 8 बिस्तर का नया आईसीयू शुरू किया जा रहा है। पिछले साल भी दिसंबर से फरवरी तक इंफ्लूएंजा फ्लू के बड़ी संख्या में मामले पहुंचे थे। यही हाल संभाग के अन्य जिलों के चिकित्सा केंद्रों में भी हैं। पीड़ित पर सामान्य तौर पर एक सप्ताह तक असर रहता है, लेकिन प्रभाव 3 से 4 सप्ताह तक रह सकता है, जिसमें बच्चा खुद को थका महसूस करता है। इंफ्लूएंजा (फ्लू) एक संक्रामक वायरल संक्रमण है जो फेफड़ों के वायु मार्ग को प्रभावित करता है। यह सर्दियों के मौसम की सबसे गंभीर और वायरल बीमारियों में से एक है। फ्लू से बचने के लिए सबसे अच्छा तरीका वार्षिक फ्लू का टीकाकरण है।
लक्षण - शरीर में दर्द, सिरदर्द, खांसी, सांस लेने में तकलीफ। बुखार के बाद निमोनिया की शिकायत
बचाव - लक्षण दिखने पर बच्चों को आइसोलेट करें। स्कूल या अन्य सार्वजनिक स्थलों पर न भेंजे, ताकि दूसरे बच्चे चपेट में न आएं। गर्म पानी का सेवन कराएं, तापमान के मुताबिक कपड़े पहनाएं। तुरंत डॉक्टरी परामर्श लें।