- सरकार ने 2016 में 22 इकाइयों को 900 कनाल भूमि की थी आवंटित
- 13 इकाइयां 761 कनाल भूमि के लिए जमा करवा चुकीं राशि
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। औद्योगिक क्षेेत्र सहार एस्टेट को विकसित करने में हो रही देरी के कारण दो बड़ी इकाइयों ने आवंटित प्लाॅट लौटा दिए हैं। उद्योगपतियों ने सरकार से उद्योग स्थापित करने के लिए जमा कराई गई राशि वापस देने की मांग की है।
विभाग के अधिकारियों के मुताबिक दोनों वापस किए गए प्लाॅटों में 120-120 कनाल भूमि आवंटित की गई थी। इसके लिए उद्योगपतियों ने आठ लाख रुपये प्रति कनाल के हिसाब से सरकार को राशि जमा की थी, जो अब वापस मांगी गई है। जिन दो बड़ी औद्योगिक इकाइयों ने हाथ पीछे खींचे हैं। इनमें मेसर्स जीएसए इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स मैकलॉयड फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इनमें से एक पंजाब की सबसे बड़ी और दूसरी देश की फार्मास्युटिकल्स में छठी बड़ी कंपनी मानी जाती है।
सूत्रों के अनुसार, दो बड़े उद्योगपतियों के वापस जाने से जम्मू-कश्मीर के राजस्व को नुकसान तो होगा ही, बल्कि इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार न मिलने का भी नुकसान होगा। बता दें कि वर्ष 2016-17 में जम्मू-कश्मीर लघु उद्योग विकास निगम (सिकॉप) ने सहार की 900 कनाल भूमि पर उद्योग स्थापित करने की पहल की थी। इसके लिए 22 लोगों को भूमि आवंटित की गई थी। 13 उद्योगपतियों ने 761 कनाल आवंटित भूमि के लिए राशि भी जमा करा दी थी।
इसी बीच मामला कोर्ट में चला गया। इसके चलते उद्योगपतियों को न तो आवंटित भूमि पर कब्जा मिल पाया है और न ही सिकॉप की ओर से इस औद्योगिक एस्टेट को विकसित किया जा रहा है। हालात ये हैं कि क्षेत्र में उद्योगों को स्थापित करने के लिए सिकॉप की ओर से मूलभूत सुविधा बिजली, पानी और सड़क तक की व्यवस्था नहीं की गई है। जिससे उद्योगपतियों में निराशा है।
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1885 लोगों को रोजगार मिलने की थी संभावना
सहार स्थित दोनों उद्योगों की स्थापना से लगभग 1885 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई जा रही थी। भूमि आवंटित होने से पहले दोनों औद्योगिक इकाइयों की तरफ से जारी नीति के अनुसार लगभग 400 करोड़ का निवेश होना था। इसमें मेसर्स जीएसए इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से 180 करोड़ रुपये का निवेश किया जाना था। इसमें 615 लोगों को रोजगार देने की वकालत की गई थी। वहीं, मेसर्स मैकलॉयड फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से 196 करोड़ 45 लाख का निवेश किया जाना था, जिसमें 1270 लोगों को रोजगार मिलता।
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मामला कोर्ट में विचाराधीन है। औद्योगिक क्षेत्र को विकसित नहीं किया जा रहा है। कुछ उद्योगपतियों के प्लाॅट वापस करने का मामला भी संज्ञान में है। कितनी राशि उद्योगपतियों को वापस मिलेगी, इसका निर्णय सरकार की ओर से गठित कमेटी ने करना है। मामले को कमेटी के समक्ष पेश किया जा चुका है। सिकॉप ने उद्योगपतियों को दो विकल्प दिए हैं। एक तो वे अपना उद्योग किसी दूसरी जगह पर लगा सकते हैं या कोर्ट के निर्णय का इंतजार करना होगा।
- इंद्रजीत, प्रबंध निदेशक, सिकॉप