सेना ने बारामुला जिले में मकबूल शेरवानी की कब्र का जीर्णोंद्धार किया
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सेना ने उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले में मकबूल शेरवानी की कब्र का गुरुवार को जीर्णोंद्धार किया। मकबूल एक कश्मीरी युवक थे, जिन्होंने उड़-मुजफ्फराबाद राजमार्ग पर पाकिस्तान से श्रीनगर की ओर आ रहे हमलावरों को अक्तूबर 1947 में यहां उलझाकर कर बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों को उनका शिकार होने से बचा लिया था। हालांकि, हमलावरों को जब पता चला कि उन्हें भटकाया गया है तो उन्होंने मकबूल को सूली पर लटका दिया था।
पाकिस्तान के विद्रोही हमलावरों ने जब मकबूल से श्रीनगर हवाई अड्डे की ओर जाने वाले रास्ते के लिए मार्गदर्शन करने के लिए कहा तो उन्होंने हमलावरों को गलत रास्ते पर सफलतापूर्वक गुमराह किया। भारतीय सेना के वहां पहुंचने तक शेरवानी और उनके साथियों ने सड़क ब्लॉक करने के साथ कुछ पुलों को भी ध्वस्त कर हमलावरों को रोकने की कोशिश कर श्रीनगर पहुंचने से रोक दिया था।
इसके बाद हमलावरों ने महसूस किया कि श्रीनगर हवाई अड्डे की ओर उनके मार्च में मकबूल शेरवानी ने जानबूझकर देरी की है। बहादुर योद्धा को अंतत: हमलावरों ने पकड़ लिया और उसके शरीर को क्षत-विक्षत कर दिया गया और उस पर 14 गोलियां दागने से पहले उसे सूली पर चढ़ा दिया गया। शव को एक तख्ती से बांधा गया, बाद में भारतीय सेना ने उन्हें नीचे उतारा। 7 नवंबर 1947 को शहीद की मृत्यु हो गई।
उनकी मृत्यु के दो सप्ताह बाद महात्मा गांधी ने मकबूल के सर्वोच्च बलिदान का सम्मान करने के लिए दिल्ली में एक प्रार्थना सभा में उन्हें श्रद्धांजलि दी। भारतीय सेना ने शहीद को श्रद्धांजलि दी और जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फेंट्री की दूसरी बटालियन को औपचारिक रूप से शेरवानी पलटन नाम दिया गया।