देश की पूर्वी सीमा पर चीन की सेना की गतिविधियों की काट के लिए केंद्र सरकार ने भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की रणनीतिक कमान को चंडीगढ़ से जम्मू-कश्मीर के लेह जाने का आदेश दे दिया है। कमान को मार्च के अंत तक दल-बल और साजो-सामान के साथ लेह पहुंचकर 1 अप्रैल से मोर्चा संभालने को कहा गया है।
आधिकारिक सूत्रों ने बृहस्पतिवार को बताया कि लेह सेना की 14 कोर का बेस है, जिसका मुखिया लेफ्टिनेंट जनरल रैंक का अधिकारी होता है। आईटीबीपी के वहां पहुंचने से दोनों बलों के बीच रणनीतिक और रक्षा योजनाओं को लेकर बेहतर संवाद हो सकेगा। आईटीबीपी की उत्तर-पश्चिम कमान के पास शांतिकाल में चीन से लगी भारत की 3,488 किमी लंबी सीमा की पहरेदारी की जिम्मेदारी रहती है। इसका प्रमुख पुलिस महानिरीक्षक रैंक (आईजी) का अधिकारी होता है, जो सेना के मेजर जनरल के समकक्ष होता है।
सेना ने 1999 में कारगिल युद्ध के बाद लेह में एक विशेष कोर स्थापित की थी, जो लगातार आईटीबीपी के संचालन का नियंत्रण मांगती रही है। सरकार इस मांग को बार-बार खारिज करती रही है। अब एक ही जगह पर आईटीबीपी और सेना की तैनाती से इस मुद्दे का समाधान भी हो जाएगा। आईटीबीपी के महानिदेशक एसएस देसवाल ने कहा कि हमें सीमा पर रहना है। यही वजह है कि कमान को अग्रिम क्षेत्र में भेजा जा रहा है।
2015 में ही तैयार कर लिया था प्रस्ताव
गृह मंत्रालय ने 2015 में इस रणनीतिक कदम का प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन प्रशासनिक कारणों से इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। सरकार की ओर से आईटीबीपी के लिए मंजूर रूपरेखा के मुताबिक लेह फ्रंटियर के पास लेह, श्रीनगर और चंडीगढ़ सेक्टर होंगे। तीनों सेक्टर का मुखिया डीआईजी रैंक का अधिकारी होगा।
40 सीमा चौकियों की स्थापना की मंजूरी
लेह सड़क और वायु दोनों मार्गों से जुड़ा है। आईटीबीपी को लद्दाख की 8,000 से 14,000 फुट ऊंची बर्फीली पहाड़ियों पर 40 सीमा चौकी की स्थापना की इजाजत है। यहां का तापमान शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस नीचे तक चला जाता है। इन चौकियों में मौसम नियंत्रण प्रणाली और अन्य सुविधाएं होंगी।
अब तक लेह में है आईटीबीपी का एक सेक्टर
अब तक लेह में आईटीबीपी का एक सेक्टर है, जिसका नेतृत्व डीआईजी रैंक का अधिकारी करता है। इसके तकरीबन 90,000 कर्मी न सिर्फ पैंगोंग झील की निगरानी करते हैं, बल्कि चीन से गुजरने वाली हिमालय पर्वतीय श्रृंखला के ऊपरी हिस्सों पर भी निगाह रखते हैं।