india china disputes(file photo)
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भारत और चीन के सैनिकों के बीच तनाव के चलते दोनों देशों ने एलएसी के करीब अपने जवानों की संख्या को बढ़ाने के साथ-साथ ऑर्टिलरी को भी बढ़ा दिया था। लेकिन कमांडर सत्र की हुई बैठकों के बाद दोनों देशों में अपनी सेनाओं को वापिस पीछे करने की बात को लेकर आम सहमति जताई गई है।
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दोनों देशों की सेनाओं को चरणबद्ध तरीके से पीछे हटाया जाएगा। इस प्रक्रिया में करीब दो महीने का समय लग सकता है। इस दौरान तीन चरणों में इस प्रक्रिया को करने की सहमति जताई गई है। इसके बावजूद भी चीन पर भरोसा न करते हुए भारत द्वारा पूरी सतर्कता बरतते हुए मॉनिट्रिंग की जाएगी।
बता दें कि आपसी सहमति के तहत पहले चरण में दो हफ्तों के भीतर दोनों देशों की सेनाओं को करीब 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर जाना होगा। इस दौरान कोई भी सेना किए गए समझोते का उलंघन नहीं करेगी। मिली जानकारी के अनुसार अगर इस दौरान की गई सहमति के खिलाफ कोई उलंघन होता है तो यह प्रक्रिया यही रद्द की जाएगी।
इस प्रक्रिया के दूसरे चरण में एलएसी के उस पार चीनी सेना और हथियारों की भारी संख्या में तैनाती को वापिस ले जाना होगा। वहीं अगर शुरू के दो चरण ठीक से पूरे होते हैं तो फिर उसके बाद तीसरे चरण की शुरुआत की जाएगी।
जिसमें भारतीय सेना अप्रैल 2020 के स्टेटस-को और पेट्रोल करने वाली जगह पर विवाद न हो इसके लिए आगे काम करेगी। इस बीच यह अनुमान लगाया जा रहा है कि भारतीय सेना द्वारा तीसरे चरण में ही पंगोंग-सो की बात होगी ताकि दोनो देशों की सेनाएँ अपने-अपने अप्रैल 2020 के स्टेटस-को वाली जगह पर जा सके।