रियासत में कैंसर का शिकंजा तेजी से कसता जा रहा है। पिछले पांच वर्ष में राज्य में 26000 लोग विभिन्न कैंसर से पीडि़त हो चुके हैं। धूम्रपान का चलन बढ़ने से फेफड़ों के कैंसर से लोग ज्यादा ग्रस्त हैं।
पिछले साल ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर 898 मामलों के साथ राज्य में सबसे ऊपर रहा। जबकि लेह और कारगिल में 62 मामलों के साथ सबसे नीचे रहे। सदन में शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री बाली भगत ने पीडीपी एमएलसी फिरदोस टाक के एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 में 4556 कैंसर के मामले सामने आए। इसी तरह 2012 में 4848, 2013 में 5068, 2014 में 5568 और 2015 में 6358 मामले सामने आए।
वर्ष 2015 में जम्मू में 853, गांदरबल में 283, बडगाम में 452, पुलवामा में 451, बारामुला में 573, कुलगाम में 263, अनंतनाग में 489, शोपियां में 169, बांडीपुरा में 168, कुपवाड़ा में 273, राजोरी में 205, डोडा में 139, रामबन में 172, उधमपुर में 118, कठुआ में 265, सांबा में 169, किश्तवाड़ में 113, रियासी में 117 और पुंछ में 126 मामले सामने आए। पुरुषों में फेफड़ों का कैंसर सबसे ऊपर है। उसके बाद गले, गेस्ट्रो आंतरिक कैंसर आदि शामिल हैं।
इसी तरह महिलाओं में सरवाइकल कैसर, ब्रेस्ट कैंसर, गले, गेस्ट्रो आंतरिक कैंसर और फेफड़ों का कैंसर शामिल है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अस्पतालों में कैंसर पीडि़तों को उचित इलाज दिया जा रहा है।