जम्मू। जीएमसी सहित अन्य एसोसिएटेड अस्पतालों में लाखों रुपये के कई इंसीनिरेटर धूल चाट रहे हैं। बंद कमरों में पड़े इन इंसीनिरेटर पर जंग लगने लगी है। इनको एक दिन भी नहीं चलाया जा सका।
जेएंडके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानदंडों पर खरा न उतरने पर इन्हें चलाने की अनुमति नहीं दी गई, लेकिन सवाल यह उठता है कि इन्हें स्थापित करने से पहले तय मानकों को क्यों नहीं देखा गया। एसोसिएटेड अस्पतालों में संक्रमित और सामान्य बायो मेडिकल वेस्ट को खत्म करने के लिए निजी एजेंसी की सेवाएं ली जा रही हैं।
सूत्रों के अनुसार करीब साढ़े तीन वर्ष पहले बायो मेडिकल वेस्ट के उचित निस्तारण के लिए सप्लाई इंस्टालेशन टेस्टिंग एंड कमीशिनिंग (एसआईटीसी) प्रोजेक्ट के तहत मेकेनिकल विंग ने जीएमसी में 100 किलो प्रति घंटा, एसएमजीएस में 50 किलो और सीडी (चेस्ट डिजीज) अस्पताल में 25 किलो के नए इंसीनिरेटर लगाए गए।
इन पर करीब 80 लाख रुपये की लागत आई। इंसीनिरेटर को संबंधित अस्पताल प्रशासन को सौंपने से पहले प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड डिवाइज उपकरण लगाने को कहा। तीनों इंसीनिरेटर, बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एंड हैंडलिंग रूल 2016 के मानदंडों पर खरा नहीं उतरे थे। एक अन्य प्रस्ताव में नए इंसीनिरेटर को अन्य जिला अस्पतालों में शिफ्ट करने की बात कही गई थी।
कैग रिपोर्ट में कंट्रोल आडिटर जनरल आफ इंडिया ने तीनों इंसीनिरेटर को स्थापित करने पर सवाल उठाए थे। इन्हें अन फ्रूटफुल एक्सपेंडिचर श्रेणी में रखा गया था। एसोसिएटेड अस्पतालों में रोजाना 1700-1800 बेडों से बायो मेडिकल वेस्ट उठाई जा रही है।
मान्यता नहीं मिली: प्रिंसिपल
‘एसोसिएटेड अस्पतालों में नए इंसीनिरेटर को चलाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मान्यता नहीं मिली है। इसके लिए औपचारिकताएं पूरी करने पर काम किया जा रहा है।’ -डॉ. सुनंदा रैना, जीएमसी की प्रिंसिपल