सुरक्षा एजेंसियों ने कश्मीर के कुछ युवकों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। ये युवा प्रधानमंत्री के पिछले महीने कश्मीर दौरे के दौरान आईएस के सहयोगियों से इंटरनेट से जुड़े थे।
हालांकि सभी युवाओं को आईएस के खतरों पर बताकर और चेतावनी देकर उनके परिजनों को सौंप दिया गया। यह जानकारी सुरक्षा एजेंसी के एक अधिकारी ने दी।
अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि कश्मीरी युवक आईएस में रूचि नहीं दिखा रहे हैं, लेकिन कुछ केस ऐसे हैं जिसमें कुछ युवा सोशल नेटवर्किंग साइटस के जरिए आईएस के समर्थकों से मिले हैं।
उन्होंने कहा कि हां ये युवा आईएस से इंटरनेट पर कनेक्ट थे। कुछ प्रधानमंत्री की सात नवंबर को कश्मीर दौरे से पहले तो कुछ उस दौरान संपर्क में थे। पुलिस ने उन्हें सवाल पूछे। बाद में उन्हें चेतावनी देकर, काउंसलिंग करके उनके परिवार को सौंप दिया गया।
लश्कर और हिजबुल के लोग लहरा रहे हैं आईएस का झंडा
कुछ युवाओं ने कहा कि इंटरनेट पर बातचीत के दौरान उन्हें नहीं मालूम था कि वो किससे बातचीत कर रहे हैं। आईएस कश्मीर तक पहुंच चुका है इसकी संभावना आज की तारीख में नहीं बढ़ी थी।
ये चिंता का विषय था जब ये लोग कश्मीर के युवाओं से इंटरनेट के द्वारा जुड़ना चाहते हैं। कश्मीर में आईएस के झंडे लहराने की खबरों पर उन्होंने कहा कि ये युवा सिर्फ शुक्रवार को झंडे लहराते हैं।
ये सिर्फ पब्लिसिटी के लिए ऐसा करते हैं, जब से पब्लिसिटी मिलना कम हुआ है तो आईएस के झंडे लहराना भी कम हो गया है। कश्मीर में आईएस की मौजूदगी पर उन्होंने इंकार कर दिया, लेकिन कहा कि ये भी हो सकता है कि लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन के लोग कर रहे हैं।
एजेंसियां कर रही है कश्मीर इंटरनेट की मॉनिटरिंग
उन्होंने कहा कि एक दूसरे से होड़ करने के लिए ही ये एक तरह के कपड़े पहनते हैं और वह या तो लश्कर में या फिर आईएस ज्वाइन कर लेगा। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां कश्मीर के इंटरनेट ट्रैफिक को मॉनिटर कर रही हैं।
जिसमें युवाओं का आईएस में रुचि देखा जा रहा है। एजेंसियां इस वक्त हर गतिविधि पर नजरें बनाए हुए हैं। लश्कर ने पिछले ही महीने आईएस से अपनी दूरी का बयान दिया था।
लश्कर के एक प्रवक्ता ने कहा था कि कश्मीर के लोग किसी भी बाहर के ग्रुप से सहयोग नहीं मांगना चाहते हैं। उन्होंने आईएस को एक एंटी इस्लामिक पश्चिमी देशों की की उपज बताया था।