लाल चौक सहित श्रीनगर शहर के कुछ इलाकों में अब बाढ़ का पानी नहीं है अथवा घट गया है। पर लोगों की मुसीबतें अभी भी जस की तस बनी हुईं हैं। श्रीनगर के सबसे व्यस्त रहने वाले लाल चौक में जहां बीते 15 दिन पहले दिनभर चहल पहल रहा करती थी, वहां अब पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है।
अगर कुछ है तो मलबे के ढेर और दुकानदारों के मायूस चेहरे। रेजीडेंसी रोड, अप मार्केट लांबर्ट लेन में दुकान करने वाले निसार अहमद वाणी बताते हैं कि कब लाल चौक पहले जैसा हो पाएगा यह कह पाना बहुत मुश्किल है। वाणी कहते हैं कि दुकान में जो सामान था सब बर्बाद हो गया, पर खुदा का शुक्र है कि जिंदगियां बच गईं।
उनका परिवार सलामत है। एक अन्य दुकानदार मुदस्सर अहमद का कहना है कि सरकार की ओर से प्रशासन को सफाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं, ऐसा सुनने में आया था। पर यहां शहर के सबसे प्रमुख बाजार में सड़कों पर जो गंदगी फैली हुई है, उससे नहीं लगता कि सरकार और प्रशासन सफाई को लेकर गंभीर हैं।
सरकार और प्रशासन से ज्यादा मदद न मिल पाने के चलते लोगों की चिंताएं और बढ़ गईं हैं। लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि जीवन को फिर से पटरी पर लाने की जद्दोजहद कहां से शुरू करें।
रेलवे ट्रैक कहीं वरदान तो कहीं मुसीबत
कश्मीर में शुरू हुई बारामुला-बनिहाल ट्रेन सेवा जहां कुछ इलाकों के लिए वरदान साबित हुई तो वहीं बाढ़ पीड़ित कुछ इलाकों में मुसीबत भी बनी। गुलजारपोरा के गुलाम नबी हाजम बताते हैं कि उनके गांव में रेलवे ट्रैक 15 से 20 ऊंचे बांध पर बनाया गया है। इससे ट्रैक के दोनों ओर पानी भर गया है।
हाजम का कहना है कि अगर रेलवे ट्रैक 15 से 20 फीट की ऊंच्राइ पर नहीं बनाया गया होता तो उनके गांव में 8 से 10 फुट तक पानी नहीं भरता। लोगों का कहना है कि रेलवे ट्रैक निर्माण से जुड़े इंजीनियरों को चाहिए था कि बांध बनाते समय कुछ-कुछ दूरी पर गैप बनाए जाते, पर ऐसा नहीं किया गया जिससे गांव में पानी भर गया। पर वहीं, दक्षिण कश्मीर के लोगों के लिए यही बांध वरदान साबित हुए और पानी उनके क्षेत्र में नहीं घुस पाया।