- चार साल में 76 बच्चे लिए गए गोद, लड़के 43 और लड़कियां 33
- विदेशी दंपती ने सिर्फ एक बच्ची को अपनाया, जागरूकता अब भी बड़ी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो/गौरव रावत
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है, लेकिन इसमें बेटों को बेटियों की तुलना में ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) की रिपोर्ट के अनुसार, बीते चार वर्षों में जम्मू-कश्मीर से कुल 76 बच्चों को गोद लिया गया, जिनमें 43 लड़के और 33 लड़कियां शामिल थीं।
वर्ष 2021-22 में जम्मू-कश्मीर से गोद लिए गए बच्चों की संख्या सिर्फ एक थी, वह भी एक बच्ची। इसके बाद वर्ष 2022-23 में पांच बच्चों को गोद लिया गया, जिनमें तीन लड़के और दो लड़कियां थीं। वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा 31 तक पहुंच गया, जिसमें 13 लड़के और 18 लड़कियां थीं। सबसे अधिक बच्चे वर्ष 2024-25 में गोद लिए गए, जब 27 लड़कों और 12 लड़कियों को नए माता-पिता मिले। यानी बीते चार वर्षों में जम्मू-कश्मीर में 43 बेटों, जबकि 33 बेटियों को गोद लिया गया।
हिमाचल से आगे, तो पंजाब से पीछे जम्मू-कश्मीर
अगर पड़ोसी राज्यों से तुलना करें, तो जम्मू-कश्मीर बच्चों को गोद दिए जाने के मामले में हिमाचल प्रदेश से आगे है, लेकिन पंजाब से काफी पीछे। हिमाचल प्रदेश में पिछले चार वर्षों में सिर्फ 26 बच्चे गोद लिए गए, जिनमें 14 लड़के और 12 लड़कियां थीं। वहीं पंजाब में इसी अवधि में 204 बच्चों को गोद लिया गया, जिनमें 67 लड़के और 137 लड़कियां थीं। पंजाब में बेटियों को गोद लेने की प्रवृत्ति अधिक देखी गई है।
प्रदेश में विदेशी दंपतियों की रुचि नहीं
इन चार वर्षों में विदेशी दंपतियों द्वारा जम्मू-कश्मीर से सिर्फ एक बच्ची को गोद लिया गया, वह भी वर्ष 2023-24 में। बाकी तीन वर्षों में किसी भी विदेशी दंपती ने कोई बच्चा गोद नहीं लिया। इससे साफ है कि जम्मू-कश्मीर से बच्चों को गोद लेने में विदेशी दंपतियों की रुचि बेहद कम है। इसके उलट, पंजाब से चार साल में 126 बच्चों को विदेशी दंपतियों ने गोद लिया। वहीं हिमाचल से एक भी बच्चा किसी विदेशी दंपती द्वारा गोद नहीं लिया गया।
कैसे करें गोद लेने के लिए आवेदन
जो दंपती बच्चा गोद लेना चाहते हैं, उन्हें केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण की वेबसाइट www.cara.nic.in पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण करना होता है। पंजीकरण के बाद यह जानकारी मिलती है कि किस राज्य में और किस संस्था में कितने बच्चे गोद लेने के लिए उपलब्ध हैं। इच्छुक अभिभावकों को दो से तीन बच्चों के विकल्प भी दिखाए जाते हैं, जिनमें से वे चयन कर सकते हैं।