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Jammu News: जम्मू कश्मीर में मच्छरों ने 10 साल में 48 लोगों की जान ली, 26 हजार लोग हुए संक्रमित

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अमर उजाला ब्यूरो
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जम्मू। प्रदेश में मच्छर हर साल औसतन चार से पांच लोगों की जान ले रहे हैं। यह आंकड़ा सांप के काटने से होने वाली मौतों से कहीं अधिक है। पिछले 10 साल में मच्छरों से होने वाली विभिन्न बीमारियों से 48 लोगों की मौत हुई जबकि इन वर्षों में 26 हजार लोग संक्रमित हुए। यह आंकड़ा हर साल बढ़ रहा है। सच है कि फाइलों में खूब लिखा जा रहा कि मच्छरों के मारने के सभी उपाय किए जा रहे हैं पर ये दावे हवा में नजर आ रहे हैं। सांप काटने से हर साल दो से चार लोगों की मौत होती है।
प्रदेश में तीन प्रजातियों के मच्छर बीमारियां फैलाने का मूल कारण बने हुए हैं। मच्छरों की ये प्रजातियां मादा एनाफिलीज, एडीज, क्यूलेक्स हैं। एडीज मच्छर चिकनगुनिया, डेंगू बुखार और पीला बुखार के वाहक हैं। 2015 से 2025 के बीच 10 सालों में सिर्फ डेंगू से ही 46 लोगों की मौत हुई और 24 हजार से अधिक लोग संक्रमित हुए। डेंगू सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। प्रदेश में 2020 के बाद से डेंगू की जांच बढ़ाई गई है और मामले भी बढ़े हैं। 2022 में सबसे ज्यादा 18 लोगों की मौत डेंगू के बुखार से हुई थी। इसके बाद संख्या लगातार बढ़ रही है।
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खर्च भी खूब हो रहा
राज्य मलेरिया नियंत्रण कार्यालय के अनुसार 2024-25 में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए जागरूकता, फॉगिंग सहित अन्य उपकरण की खरीद पर 86.50 लाख रुपये का खर्च हुआ। 2023-204 में यह खर्च 1.04 करोड़ रुपये था। इसके अलावा नगर निगम जम्मू भी हर साल औसतन पांच से सात लाख रुपये का खर्च करता है।

जम्मू शहर में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक
जम्मू संभाग में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों में जम्मू जिला विशेषकर नगर निगम क्षेत्र हॉट स्पॉट बन रहा है। उधमपुर, कठुआ, सांबा जिले में भी संक्रमित लोग मिलते हैं। डोडा जिला भी इसके साये में है। जलवायु परिवर्तन भी इसका कारण है। प्रदेश भर से आने वाले डेंगू के मामलों में 90 फीसदी मामले सिर्फ जम्मू नगर निगम क्षेत्र से ही आते है।


लापरवाही न करें, जांच कराएं
राज्य मलेरिया नियंत्रण अधिकारी डीजे रैना ने कहा कि मच्छर की एक से दूसरी पीढ़ी में वायरस ट्रांसफर होता है। ऐसा तब भी होता है जब वह किसी संक्रमित व्यक्ति काटे भी ना। बुखार होने पर पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। जांच कराएं। खुद से दवाई लेने से बचना चाहिए। इससे शरीर में मौजूद प्लेटलेट कम हो जाते हैं। डॉक्टर की परामर्श पर ही दवाई लेनी चाहिए। अगर कोई ट्रैवलिंग हिस्ट्री है तो लापरवाही न करे, जांच करवाएं। मच्छरों की प्रतिरोधी क्षमता अब बढ़ गई है। जहरीले धुएं से वह खुद को बचा लेते हैं। ऐसे में साफ-सफाई रखना सबसे अधिक असरदार है। जम्मू-कश्मीर मलेरिया के मामले फिलहाल नहीं आ रहे हैं।
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20 अगस्त 1897 को ब्रिटिश डॉक्टर सर रोनलाड रॉस ने एक खोज की। उन्होंने दुनिया को बताया कि इंसानों के बीच मलेरिया फैलाने के लिए मादा एनाफिलीज मच्छर जिम्मेदार है। मलेरिया का कारण बनने वाला परजीवी इस मादा मच्छर के ही पेट में पाया गया थ। तक से हर साल 20 अगस्त को विश्व मच्छर दिवस के रूप में मनाया जाता है।

साल-दर-साल इतने बढ़े मामले
साल मामले मौतें
2015 153 0
2016 79 01
2017 488 0
2018 214 0
2019 439 0
2020 53 0
2021 1709 04
2022 8269 18
2023 6403 10
2024 6876 01
2025 62 01 अब तक
-
सांप काटने के मामले
वर्ष मामले
अप्रैल 2021 से मार्च 2022 तक 130
अप्रैल 2022 से मार्च 2023 तक 221
अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक 47
अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 117
अप्रैल 2025 से अभी तक 18
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