बंद के दौरान पत्थरबाजों पर नियंत्रण करती पुलिस
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दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम जिले में मुठभेड़ के बाद हुए विस्फोट में सात नागरिकों की मौत पर अलगाववादियों के बंद को देखते हुए सोमवार को सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। शहर में धारा 144 लगाई गई थी। कुछ इलाकों में पत्थरबाजी की घटना भी हुई। कई जगहों पर लोगों ने रैलियां निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। मंगलवार को लाल चौक पर धरना देने का एलान किया गया है। कश्मीर चैंबर आफ कामर्स, कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति और ऑटो रिक्शा डाइवर्स एसोसिएशन ने भी बंद का समर्थन किया था।
सैय्यद अली शाह गिलानी, मीरवाइज मौलवी उमर फारूक और यासीन मलिक के नेतृत्व वाले ज्वाइंट रजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) की ओर से कुलगाम घटना को लेकर दी गई बंद की कॉल का अच्छा खासा असर देखने को मिला। सभी दुकानें, कारोबारी प्रतिष्ठान, शिक्षण संस्थान, पेट्रोल पंप आदि बंद रहे। सड़कों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट गायब रहा। उपद्रवियों से निपटने के लिए संवेदनशील इलाकों में तारबंदी की गई थी।
सोपोर में शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के छात्रों ने रैली निकाली। इस दौरान राष्ट्र विरोधी और सरकार विरोधी नारेबाजी की गई। लंगेट से निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद ने भी एक प्रदर्शन रैली का नेतृत्व किया। दक्षिणी कश्मीर के कुछ इलाकों में भी पत्थरबाजी हुई। हिंसा की आशंका में बारामुला-बनिहाल रेल लाइन पर रेल सेवा स्थगित रखी गई थी।
परीक्षाएं स्थगित
बंद को देखते हुए जम्मू कश्मीर स्कूल बोर्ड तथा इस्लामिक यूनिवर्सिटी ने सोमवार की परीक्षाएं स्थगित कर दीं। बंद के दौरान हिंसा की आशंका को देखते हुए यह फैसला किया गया था।