ट्यूशन पढ़ने वाली छात्राओं और देर शाम को कार्यालयों से लौटने वाली महिलाओं व युवतियों के लिए स्पेशल बसें और मिनी बसें होनी चाहिए। यदि ऐसा हो तो यह महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मिलने वाला बेहतरीन तोहफा होगा।
कम से कम हर एक रूट पर शाम के समय यह बसें चलाई जाएं। आईजी ट्रैफिक बसंत रथ की तरफ से ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को पत्र लिखा गया है, जिसमें कहा गया है कि युवतियों तथा महिलाओं के लिए हर रूट पर देर शाम के लिए कम से कम एक बस चलाई जाए।
ताकि उन्हें सुविधा मिल सके। क्योंकि शाम के बाद छात्राओं तथा काम करने वाली महिलाओं को घर जाने में परेशानी होती है। वह कई बैठकों में इस बात को सुन चुके हैं। समाज के कई वर्गों से उन्होंने इस बारे में जानकारी ली है।
बसंत ने पत्र लिखकर कहा कि शाम साढ़े पांच बजे के बाद मेटाडोर लगाई जाए। हर रूट पर होने से महिलाओं तथा युवतियों के लिए विशेष मेटाडोर होगी, जिसमें वह आराम से सफर कर सकती हैं। पत्र में कहा गया कि कई छात्राएं शाम को ट्यूशन पढ़ने के बाद वापस आती हैं।
कई कार्यालय में काम करने वाली महिलाएं आती हैं। ऐसे में उनके साथ शरारत भी होती है, जिस बारे में उन्हें कई लोगों से बैठकें करने के बाद जानकारी मिली है। इसलिए इस संदर्भ में कदम उठाया जाना चाहिए, जिससे की साफ माहौल दिया जा सके।
बता दें कि इससे पहले भी आईजी की तरफ से कई पत्र लिखे जा चुके हैं, जिसमें सुधार की बातें करने को कहा गया है। सर्दियों में शाम साढ़े पांच बजे, छह बजे, साढ़े छह बजे और सात बजे बस चलाने को कहा है। जबकि आगे गर्मियों में यह सेवा शाम सात बजे से रात 9 बजे तक करने को कहा गया है।