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जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: चेक बाउंस केस में राहत नहीं, पहले साबित करो उधार देने की हैसियत

Thu, 12 Jun 2025 11:23 AM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू

सार

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने कहा कि चेक बाउंस मामलों में शिकायतकर्ता को उधार देने की हैसियत और लेन-देन के सबूत पेश करने होंगे। सिर्फ चेक दिखाना पर्याप्त नहीं है जब तक आमदनी और गवाहों से कर्ज साबित न हो।
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Court - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में साफ कर दिया है कि अगर किसी ने उधार दिया है तो उसे अपनी आमदनी और उधार देने की हैसियत भी साबित करनी होगी। सिर्फ चेक का होना ही ये साबित नहीं करता कि कर्ज दिया गया था। 

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यह मामला जगदीश राज गुप्ता नाम के शख्स की ओर से दर्ज की गई शिकायत से जुड़ा है। उनका कहना था कि उन्होंने परषोत्तम गुप्ता को 20 लाख रुपये उधार दिए थे और नकद रकम थी। उसके बदले में परषोत्तम से चेक लिया था। जब यह चेक बैंक में लगाया गया तो बाउंस हो गया। इसके बाद उन्होंने अदालत में केस दायर किया। दोनों व्यक्ति जम्मू के ही रहने वाले हैं। 

परषोत्तम गुप्ता ने माना कि उन्होंने चेक दिया था, लेकिन उन्होंने कहा कि यह चेक किसी जमीन के सौदे के सिलसिले में दिया गया था जो बाद में रद्द हो गया। उन्होंने यह भी बताया कि उस सौदे के तहत पहले ही पांच लाख रुपये का एक चेक भुनवाया गया था और साढ़े तीन लाख रुपये नकद भी दिए थे। 
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कोर्ट ने शिकायतकर्ता की बातों पर भरोसा नहीं किया। वजह ये थी कि उसने न तो कोई दस्तावेज दिखाया और न ही कोई गवाह लाए। उन्होंने कहा था कि पैसा भाइयों और एक दोस्त की मौजूदगी में दिया था, लेकिन किसी को भी कोर्ट में पेश नहीं किया।इसके अलावा, शिकायतकर्ता की आमदनी सिर्फ 15 से 20 हजार रुपये महीने बताई गई, लेकिन कोई आयकर रिटर्न या बैंक डिटेल भी पेश नहीं की गई जिससे पता चलता कि वो इतनी बड़ी रकम उधार दे सकते थे।

कोर्ट ने कहा कि जब तक उधार देने की बात और देने की हैसियत साबित नहीं होती तब तक चेक बाउंस के कानून के तहत आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने आरोपी की दलील को ज्यादा भरोसेमंद माना क्योंकि उन्होंने लगातार एक जैसा बयान दिया और अपने पक्ष में गवाह भी पेश किए।

अंत में हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिस फर्म के नाम चेक दिया गया था वह आरोपी की ही खुद की फर्म थी इसलिए उसे अलग से पार्टी बनाने की जरूरत नहीं थी।
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