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'आतंकी मेरी बेटी को बंधक बनाते तो भी मैं उन्हें रिहा नहीं होने देता'

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जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री डा. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि 1999 में हुए विमान अपहरण कांड में यात्रियों की रिहाई के बदले आतंकियों को रिहा करने के फैसले का उन्होंने विरोध किया था। उन्होंने कहा कि आतंकियों की रिहाई से भारत को एक ‘कमजोर राष्ट्र’ के रूप में देखा गया।
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रॉ के पूर्व प्रमुख एएस दुलत की पुस्तक ‘कश्मीर, दि वाजपेयी ईयर’ के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए फारूक ने कहा, ‘कोई भी देश बिना बलिदान के नहीं बनता है। यदि आतंकी मेरी बेटी को भी बंधक बना लेते तो मैं एक भी आतंकी रिहा नहीं करता।’

फारूक ने कहा कि उन्होंने तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी और विदेश मंत्री जसवंत सिंह से कहा था कि यात्रियों के बदले किसी को रिहा नहीं किया जाना चाहिए।
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आड़वाणी नहीं चाहते थे आंतकियों को रिहा करना

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘मैंने आडवाणी और जसवंत से फोन पर बातचीत की और कहा कि हम एक राष्ट्र के रूप में इतने कमजोर हैं कि हम ऐसी परिस्थितियों को संभाल नहीं कर सकते।’ डा. अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने महसूस किया कि आडवाणी आतंकियों की रिहाई के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन उन्हें इसके लिए जबरन धकेला जा रहा था।

अब्दुल्ला ने कहा कि 1989 में मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद का आतंकियों ने अपहरण किया था। मैं कश्मीर से बाहर था। जब घटना की जानकारी मिली तो कश्मीर लौटा और मुफ्ती से मिला।

मैंने उसे कहा कि रूबिया मेरी बेटी की तरह है और मैं उसके लिए कुछ भी करूंगा। केंद्र से दो मंत्री कश्मीर पहुंचे। आईके गुजराल ने कहा कि यदि हम आतंकियों को रिहा नहीं करेंगे तो उनकी सरकार गिर जाएगी।
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विमान को अमृतसर में क्यों नहीं रोका गया?

मुझे आतंकियों की रिहाई के लिए राजी किया गया, जबकि मेरे विपक्षी इसके लिए राजी नहीं थे। क्योंकि वह जानते थे कि साऊदी अरब जैसे मुस्लिम देश भी युवती के अपहरण का विरोध कर रहे हैं। आतंकियों की रिहाई के आदेश देते हुए मैंने दुलत से कहा कि इसकी हमें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और हमने चुकाई भी।

फारुख अब्दुल्ला ने कंधार विमान अपहरण कांड पर कहा कि मैं कमांड पर होता तो विमान के टायर में गोली मार देता और भूल जाता कि दिल्ली क्या कहती। 158 लोगों के लिए तीन कट्टर आतंकियों को रिहा कर दिया गया।
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