शिक्षकों ने उठाए सवाल-कहा बिना वजह खतरे में डाला जा रहा। प्रदेश में 23 हजार से अधिक सरकारी स्कूल हैं, जिसमें 1.25 लाख टीचर और 25 हजार नॉन-टीचिंग स्टाफ है।
जम्मू-कश्मीर में स्कूल बंद होने के बावजूद शिक्षकों को बुलाए जाने पर शिक्षक खफा हैं। उन्होंने कहा कि अगर स्कूल बंद हैं तो उनको इस महामारी के बीच स्कूल बुलाने का मकसद क्या है। वह जो काम स्कूल में करते हैं वो घर बैठे ऑनलाइन भी कर सकते हैं।
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शिक्षकों ने कहा कि प्रशासन ने जमीनी स्तर पर कई पाबंदियां लागू की हैं और ब्रेक द चेन का स्लोगन दिया है। लेकिन टीचरों को स्कूल क्यों बुलाया जा रहा है। प्रदेश में 23 हजार से अधिक सरकारी स्कूल हैं, जिसमें 1.25 लाख टीचर और 25 हजार नॉन-टीचिंग स्टाफ है। इनमें से कश्मीर में करीब 60 हजार टीचिंग स्टाफ और 13 हजार से अधिक नॉन-टीचिंग स्टाफ है।
विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि उनका अभी कोई भी रोस्टर नहीं बनाया गया है फिलहाल सभी स्टाफ को आने को कहा है। इस बीच टीचरों का यह कहना है कि उन्हें बिना किसी वजह के खतरे में डाला जा रहा है। श्रीनगर के एक स्कूल टीचर आसिमा नबी ने बताया कि जिस स्कूल में वह काम करती हैं वहां उनके साथ के अन्य शिक्षकों में से आठ पॉजिटिव पाए गए जिसके बाद से स्कूल बंद करना पड़ा।
उनका कहना है कि वह स्कूल जाते हैं ऑनलाइन क्लास देने के लिए और वह यह काम घर से भी कर सकते हैं। श्रीनगर के डॉक्टर मुजफ्फर ने ट्वीट कर कहा कि पिछले एक सप्ताह में श्रीनगर में 30 से अधिक टीचर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। सरकार के इस फैसले पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।