मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वीरवार को मशीन-निर्मित कालीनों को कश्मीरी हस्तनिर्मित उत्पादों के रूप में बेचे जाने के मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को उन शोरूम और खुदरा दुकानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए जो कश्मीरी हस्तनिर्मित कालीनों के लेबल लगाकर मशीन-निर्मित कालीन बेच रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये नकली कालीन कश्मीरी हस्तनिर्मित कालीनों के विश्व प्रसिद्ध ब्रांड को नुकसान पहुंचाएंगे और उन कारीगर परिवारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे जो अपनी आजीविका के लिए इस शिल्प पर निर्भर हैं।
कालीन निर्यात संवर्धन परिषद, भारतीय रेशम निर्यात संवर्धन परिषद, मीरास कालीन बुनकर सहकारी समिति, कश्मीर कालीन क्लस्टर विकास संगठन और कश्मीर कालीन निर्माता संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने नागरिक सचिवालय श्रीनगर में मुख्यमंत्री से मुलाकात की और सभी हस्तशिल्प-पंजीकृत शोरूमों में मशीन-निर्मित कालीनों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने और सख्त प्रवर्तन तंत्र बनाने की मांग की।
उन्होंने कुछ बेईमान व्यापारियों द्वारा मशीन-निर्मित कालीनों पर नकली जीआई लेबल के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने इस शिल्प, कश्मीर की पहचान और कारीगरों की आजीविका के संरक्षण का आह्वान किया।मणिगाम, गांदरबल के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर भविष्य में संस्थागत उपयोग के लिए अपने क्षेत्र में ज़मीन के एक हिस्से की सुरक्षा का अनुरोध किया। मानव संसाधन एजेंसी के एक प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू-कश्मीर आवास बोर्ड के पास लंबित वेतन के संबंध में अपनी शिकायत दर्ज कराई।
दंत चिकित्सकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने दंत चिकित्सकों के पदों के सृजन और नियुक्ति की मांग रखी। सोपोर के विधायक और त्रेहगाम के विधायक ने भी अपने निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए मुख्यमंत्री से मुलाकात की।
निजी स्कूल संघ के एक अन्य प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष निजी स्कूलों से संबंधित कई मुद्दे उठाए। इसमें जैसे राज्य स्कूल मानक प्राधिकरण (एसएसएसए) की स्थापना, निजी स्कूलों को विभागों द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने में आसानी और तेजी लाना, किराए के आवासों में संचालित स्कूलों के लिए 10 साल की लीज-डीड की आवश्यकता की बात बताई।
विभिन्न विभागों द्वारा निजी स्कूलों को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देने में देरी और सेवाओं के वितरण में देरी के मुद्दे पर, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विस्तार से बताया कि कल आयोजित पीएसजीए बैठक में, सभी प्रशासनिक सचिवों को जम्मू और कश्मीर लोक सेवा गारंटी अधिनियम (पीएसजीए) के कार्यान्वयन का आकलन करने के लिए मासिक समीक्षा बैठकें आयोजित करने का निर्देश दिया गया था और आम जनता को सेवाएं प्रदान करने के लिए समयसीमा के सख्त पालन पर जोर दिया गया था।
सीएम ने बुधवार को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के कार्यान्वयन पर उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी, जिसमें इस बात पर जोर दिया था कि पीएसजीए ढांचा मनमाने और विलंबित निर्णय लेने को समाप्त करने और जनता को समय पर सेवाएं प्रदान करने के लिए है, जैसे राजस्व रिकॉर्ड, प्रमाण पत्र, लाइसेंस, उपयोगिता कनेक्शन आदि।