कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व सांसद लाल सिंह ने पार्टी को सर्वोपरि बताया है। अपने निवास पर साप्ताहिक बैठक के दौरान पूर्व सांसद ने साफ कर दिया कि वे कठुआ से चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनका कठुआ में चुनाव लड़ने का अनुभव खासा बुरा रहा है। वह जानते हैं कि कठुआ की जनता उन्हें पसंद नहीं करती।
यदि कोई खुद को बेहतर प्रत्याशी मानता है तो उसे अपने स्तर पर पार्टी के सामने दावेदारी पेश करनी होगी। इतना ही नहीं लाल सिंह ने कहा कि बसोहली से कुछ लोग बैठक में मौजूद हैं। यदि उनमें से किसी को भी लगता है कि वह चुनाव लड़ने लायक नेता हैं तो वह सीधे पार्टी के सामने अपनी बात रखें।
बहरहाल पूरे भाषण में सिंह ने अपने चुनावी पत्ते नहीं खोले। पूर्व सांसद ने अपने छोटे भाई और कठुआ नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष राजिंदर सिंह बब्बी का जिक्र करते हुए कहा कि यदि उसे लगता है कि वह कठुआ से चुनाव लड़कर जीत सकता है, तो पार्टी के समक्ष खुद को प्रस्तुत करे।
भाई होने के बावजूद चुनाव में टिकट दिलवाने के लिए वह किसी के प्रति पक्षपाती नहीं हो सकते। इसी तरह से यदि उनकी पत्नी को भी पार्टी टिकट के लिए पार्टी हाईकमान के समक्ष दावेदारी पेश करनी होगी। परिवार से किसी को भी टिकट मिलता है तो वे उसका समर्थन जरूर करेंगे।
गौरतलब है कि पूर्व सांसद ने पिछला विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर कठुआ से लड़ा था, जिसमें वे चौथे नंबर पर रहे थे। जबकि, बसोहली से वे दो दफा विधायक बने और उनकी पत्नी कांता अंदोत्रा एक बार विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचीं। विधानसभा चुनाव में बसोहली निर्वाचन क्षेत्र ही पूर्व सांसद की कर्मभूमि रहा है।