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मेरे पास 36 घंटे तक कोई सरकार नहीं थी : उमर

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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव के लिए जो कुछ संभव था, वह सब किया गया। विपरीत परिस्थितियों में इससे बेहतर कोई और भी नहीं कर सकता था। हमारे पास सरकार का कोई तंत्र नहीं था।
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तमाम केंद्र पानी में डूब चुके थे। उमर ने कहा कि उनके अपने आवास में बिजली नहीं थी। मोबाइल बंद पड़ा था। वह एक गेस्ट हाउस से राहत और बचाव कार्य का संचालन करते रहे।

इसी गेस्ट हाउस में एक मिनी सचिवालय बनाया गया। वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर टेक्सेशन आफिस में पांच दिन तक कैद रहे। बाहर पानी भर चुका था।
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'तीन दिन नहीं हो सका मंत्रियों से संपर्क'

इस तरह श्रीनगर में सरकार के सभी प्रतिष्ठान भी पूरी दुनिया से कट चुके थे। बाढ़ आने के बाद 36 घंटे तक हमारे पास सरकार जैसी कोई चीज नहीं थी। उसके बाद छह अफसरों के साथ एक कमरे से राहत कार्य का संचालन शुरू किया गया।

उन्होंने कहा कि विधानसभा भवन, हाईकोर्ट, पुलिस मुख्यालय और अस्पताल सभी पानी में डूबे हैं। पहले तीन दिन मंत्रियों से भी संपर्क नहीं हो पाया। एक-दो मंत्रियों के बारे में अब भी कोई जानकारी नहीं है। इसी तरह विधायकों और विधान परिषद सदस्यों से भी संपर्क संभव नहीं है।

नेशनल कांफ्रेंस के कश्मीर संभाग के अध्यक्ष नासिर वानी उनसे मिलने आए लेकिन उनके परिवार वालों से मुलाकात संभव नहीं हो पाई क्योंकि सभी होटल के एक कमरे में कैद होकर रह रहे थे।
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'टापू बन गया है श्रीनगर, मदद की जरूरत'

उमर ने कहा कि श्रीनगर से पानी को निकालने के लिए अब पंप की जरूरत है। पंप बनाने वाली कंपनियां इसमें सहयोग कर सकती हैं। लोगों को जिंदा रखने के लिए पैक्ड राशन की जरूरत है। उमर ने कहा लोगों को सब कुछ बर्बाद हो चुका है।

इसलिए प्रभावितों को तीन माह तक निशुल्क खाना और सारी सुविधाएं देने की कोशिश हो रही है। उनतक हेलीकाप्टर, नाव और ट्रक से पहुंचने की कोशिश हो रही है। श्रीनगर टापू बन गया है।

पर्यटकों को भी परेशानी हो रही है लेकिन उन्हें सब्र करना होगा। हेलीकाप्टर से प्रतिदिन डेढ़ हजार से अधिक लोगों को बाहर निकालना संभव नहीं हो रहा है।
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