श्रीनगर में बाढ़ के बाद अब महामारी का खतरा सिर पर मंडराने लगा है। बारिश के पानी के चलते लोग पहले ही संक्रमण की आशंका से जूझ रहे थे वहीं अब बाढ़ में मरने वालों के शव पानी में तैरने लगे हैं। इसके बाद से ही लोग दहशत में हैं।
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श्रीनगर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में कुछ स्थानों पर पानी के बीच मृतकों के शव तैरते देखे गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ शवों को पेड़ से बांध दिया गया है, ताकि शव इधर-उधर न बह सकें।
लोगों का कहना है कि ऐसे शवों का तत्काल कोई इंतजाम न किया गया तो इलाके में महामारी फैल सकती है। हालांकि फिलहाल बचाव अभियान में लगी टीमों का ध्यान जिंदा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने में लगा हुआ है।
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हजारों पशुओं के शवों से भी महामारी की आशंका
मुसीबतों से घिरी जन्नत पर अब बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों का खतरा मंडरा है। श्रीनगर में बाढ़ की चपेट में आकर पचास हजार से ज्यादा स्ट्रीट डाग और अन्य पशुओं की जानें गईं हैं। इनके शवों को अभी तक हटाया नहीं जा सका है।
इसके अलावा हर तरफ बिखरी गंदगी के कारण डाक्टरों ने डायरिया, टायफायड, पीलिया, डायसेंट्री (उल्टी दस्त) और मलेरिया आदि बीमारियों के फैलने की चेतावनी दी है।
उतरती बाढ़ के बाद अब प्रशासन और सरकार की महामारी फैलने की आशंका से नींद उड़ी हुई है। कई दिनों से सड़कों, गलियों और मोहल्लों में भरे पानी से हर ओर बदबू फैलने लगी है। हर ओर गंदगी है। बहुत से इलाकों में जानवरों के शव भी पड़े दिखाई दे रहे हैं।
पीने का साफ पानी न मिलने से बढ़ी समस्या
लोगों को पीने का साफ पानी भी नहीं मिल रहा है। दूषित पानी से भी लोगों के कई तरह की बीमारियों से पीड़ित होने की आशंका है। सभी चिकित्सा केंद्रों के भी पानी में डूबे होने के कारण लोगों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
अहमद अस्पताल और नर्सिंग होम के डॉक्टरों का कहना है कि आम लोगों को पीने का साफ पानी नहीं मिल रहा है। हर ओर बाढ़ का पानी भरे होने के कारण सप्लाई भी बहाल नहीं हो सकी है। अगर कुछ दिन में सप्लाई बहाल भी हो जाती है तो भी उसमें दूषित पानी मिलने की बहुत संभावना रहेगी।
अभी तक नहीं शुरू हो पाया सफाई अभियान
हालांकि, प्रशासन की ओर से भेड़ पालन विभाग को और पशु पालन विभाग को मृत पशुओं के शव जल्द हटाने और अन्य संबंधित विभागों के साथ मिलकर सफाई के समुचित बंदोबस्त करने के निर्देश जारी किए गए हैं, पर फिलहाल सफाई अभियान शुरू कर पाना मुमकिन नहीं हो पा रहा है।
उधर, बाढ़ पीड़ित जम्मू संभाग के भी बहुत से इलाकों में यही हाल है। स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डॉ. बलजीत सिंह पठानिया का कहना है कि बाढ़ के बाद कई बीमारियों के फैलने की आशंका को देखते हुए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं।
एनडीआरएफ जवानों पर पथराव, उंगली काटी
बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान चला रहे नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) के जवानों पर स्थानीय लोगों के हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे।
वीरवार को कई स्थानों पर एनडीआरएफ टीम पर लोगों ने पथराव भी किया। जबकि जवाहर नगर में एक जवान पर चाकू से वार कर उसे घायल कर दिया गया।
घायल जवान की ऊंगली कट गई है। टीम के अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय लोग राहत कार्य में मदद नहीं कर रहे, उल्टा उन पर हमला किया जा रहा है। इन हमलों के दौरान स्थानीय पुलिसकर्मी भी असहाय नजर आए।
ऐसी भी सूचना मिली है कि कुछ स्थानीय शरारती लोगों द्वारा बाढ़ में फंसे पर्यटकों का सामान वगैरह छीन लिया गया। तमाम थाने बाढ़ के पानी में समा जाने के कारण पर्यटक मदद के लिए कहीं जा नहीं पा रहे।
कुछ लोगों ने शिकायत की कि मदद के बहाने उन्हें ले जाया गया और जबरन सामान छीन लिया गया। बचाव कार्य में लगे लोगों का कोई पहचान पत्र नहीं होने से सही और शरारती तत्वों के बीच फर्क नजर नहीं आ रहा।