इस दवा में 34.24 फीसदी डायथलिन ग्लाइकोल की मात्रा पाई गई थी। इसी से बच्चों की जान गई थी। कंपनी पर 2014 से दवा निर्माण में लापरवाही के आरोप हैं। कई मामले दर्ज किए गए लेकिन दवा बनाने का काम फिर भी जारी रहा। लिहाजा इस मामले में लापरवाही के लिए जिम्मेदार सरकारी अमले पर कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाना चाहिए।