रियासत जम्मू कश्मीर की विभिन्न जेलों में 2300 कैदी बंद हैं। नेशनल कांफ्रेंस के सदस्य अली मोहम्मद डार के सवाल पर मुख्यमंत्री की तरफ से बागवानी मंत्री अब्दुल रहमान वीरी ने यह जवाब दिया। मंत्री ने कहा कि 343 अदालत से सजा मिले कैदी हैं। 37 पीएसए के तहत जेलों में हैं।
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1920 अंडर ट्रायल कैदी हैं। 37 पीएसए कैदियों में से 17 स्थानीय हैं और 30 विदेशी है। 17 स्थानीय कैदियों में से दो आतंकवादी, चार ओवर ग्राउंड वर्कर, तीन पत्थरबाज, पांच टिंबर स्मगलर और दो अपराधी, एक अलगाववादी शामिल है। 11 विदेशी रियासत के बाहर जेलों में बंद हैं।
नेकां सदस्य की ओर से कैदियों के नाम के साथ उनकी जानकारी दिए जाने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि सुरक्षा के मद्देनजर इस संबंध में जानकारी देना ठीक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि रियासत के बाहर जिन कैदियों की सजा की अवधि पूरी हो गई हैं। उन्हें रिहा करने के मामले केंद्रीय गृह मंत्रालय और केंद्रीय विदेश मंत्रालय के समक्ष उठाए जाएंगे।
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सुरक्षा कवर में 1278
रियासत जम्मू कश्मीर में सुरक्षा दायरे में 1278 लोगों पर मासिक 10 करोड़ 88 लाख 53 हजार 460 रुपये का खर्च हो रहा है। इनमें जेड प्लस की श्रेणी में 25, जेड प्लस की श्रेणी में 396, वाई श्रेणी में 150, एक्स श्रेणी के सुरक्षा कवर में 282 और एक्स टू की श्रेणी में 425 लोग शामिल हैं।
कांग्रेस सदस्य जुगल किशोर शर्मा के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री की तरफ से बागवानी मंत्री अब्दुल रहमान वीरी ने यह जवाब दिया। मंत्री ने कहा कि सुरक्षा कवर खतरे को देखते हुए दिया गया है। कश्मीर के संवेदनशील इलाकों के नेताओं या सुरक्षा कवर में आने वाले लोगों को जोखिम के अनुसार सुरक्षा कवर मिला है।
विधायकों, विधान परिषद के सदस्यों को यैलो बुक की नियामावली के तहत जम्मू कश्मीर पुलिस ने सुरक्षा कवर दिया हुआ है। कुल मिलाकर सुरक्षा कवर वाले लोगों पर मासिक 10,88,53,460.75 का खर्च हो रहा है। इनमें पीएसओ के वेतन पर 5,56,07,721.00 की राशि खर्च मासिक आधार पर खर्च हो रही है। फ्यूल पर 45,44,403.75 का खर्च आ रहा है। होटलों में ठहराने पर मासिक करीब 47,30,495.00 की राशि खर्च हो रही है।
इसी तरह आवासीय गार्ड पर 4,39,70,841.00 की राशि खर्च आ रही है। इस मामले पर कांग्रेस सदस्य जुगल किशोर शर्मा, गुलाम नबी मोंगा, नरेश गुप्ता और भाजपा सदस्य यूसुफ सोफी ने चर्चा में हिस्सा लिया और विधान परिषद सदस्यों की सुरक्षा के लिए मिले वाहनों की हालत खस्ता होने की तरफ सरकार का ध्यान खींचा।
रियासत में पश्चिमी पाकिस्तानी रिफ्यूजियों के 9823 परिवार हैं, जबकि 1947 के 31619, 1965 के 4061 और 1971 के 9442 रिफ्यूजी परिवार रह रहे हैं। विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा सदस्य चरणजीत सिंह के सवाल के जवाब में संसदीय मामलों, राहत और पुनर्वास मंत्री सईद बशारत बुखारी ने यह जवाब दिया।
मंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार की ओर से केंद्र सरकार को भेजा गया प्रस्ताव वापस आ गया था। अब नए सिरे से सरकार प्रस्ताव भेज रही है ताकि रिफ्यूजियों को राहत प्रदान की जा सकें। इससे पूर्व भाजपा सदस्य चरणजीत सिंह ने कहा कि सालों से रिफ्यूजियों के मसले लटके हुए हैं।
उनका वन टाइम सेटलमेंट होना चाहिए। पीडीपी सदस्य सुरेंद्र चौधरी ने भी कहा कि रिफ्यूजियों के मसलों का हल जल्द होना चाहिए। इस पर मंत्री ने कहा कि रियासती सरकार केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार संशोधित प्रस्ताव तैयार कर रही है और इस प्रस्ताव को केंद्र को भेजे जाने से पूर्व पहले स्टेट कैबिनेट में पेश किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह मसला सरकार के लिए भी अहम हैं और इसे न्यूनतम साझा कार्यक्रम के एजेंडे में भी जगह दी गई है।