फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलगाववाद की आग में जन्मा आतंकवाद: सेहरई पहला नेता जिसका बेटा बना आतंकी, ये लोग खुद के बच्चों को रखते हैं इससे दूर

Wed, 20 May 2020 11:17 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
विज्ञापन
Junaid Sehrai son of Hurriyat chairman Sehrai - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

डॉउनटाउन में मारा गया हिजबुल का डिवीजनल कमांडर जुनैद अहमद सेहरई किसी भी अलगाववादी परिवार का पहला सदस्य है जिसने आतंकी संगठन का दामन थामा था। मंगलवार को वह सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया। जबकि ज्यादातर अलगाववादियों के बेटे या तो सरकारी विभागों में नौकरी करते हैं या फिर विदेश में जमे हैं। जुनैद के पिता मोहम्मद अशरफ सेहरई तहरीक-ए-हुर्रियत के चेयरमैन हैं।

विज्ञापन


दूसरी ओर श्रीनगर में हुई इस मुठभेड़ के बाद सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी हो गई हैं। उनके लिए नई चुनौतियां पैदा हो गई हैं। क्योंकि सुरक्षबलों की आतंकियों के साथ यहां दो वर्ष बाद कोई मुठभेड़ हुई है। इससे पहले वर्ष 2018 में हुई अंतिम मुठभेड़ में तीन आतंकी मारे गए थे। वर्ष 2014 में यहां आतंकी गतिविधियों का लगभग खात्मा हो गया था।

घाटी में पत्थरबाजों का था मास्टर माइंड
मारा गया आतंकी जुनैद आतंकी संगठन में शामिल होने से पहले घाटी में पत्थरबाजी की घटनाओं के पीछे का मास्टर माइंड था। खासकर दक्षिण व पश्चिम श्रीनगर में। आतंकवाद निरोधक अभियानों के दौरान वह मुठभेड़स्थल के पास पहुंचकर भीड़ का नेतृत्व करता था ताकि ऑपरेशन में बाधा पहुंचाई जा सके। वह युवाओं को मुठभेड़स्थल तक पहुंचने के लिए भी उकसाता था ताकि आतंकियों को भागने में सफलता मिल सके।
विज्ञापन


हथियार लूट, बैंक डकैती में भी रहा शामिल
जुनैद विभिन्न आतंकियों घटनाओं में शामिल रहने के साथ ही युवाओं को ड्रग व नारकोटिक्स की खेप देता था। बाद में इनका इस्तेमाल वह ओजीडब्ल्यू के रूप में करता था। वह सुरक्षा बलों पर हमले कर हथियार लूट, बैंक डकैती, दक्षिण व मध्य कश्मीर में ग्रेनेड हमले में भी शामिल रहा। संगठन के नाम पर वह धन की उगाही करता था।

पुलिसकर्मियों को नौकरी छोड़ने के लिए धमकाता था

पुलिस ने बताया कि हिजबुल कमांडर जुनैद दक्षिणी कश्मीर में पुलिसकर्मियों को नौकरी छोड़ने के लिए धमकाता था। उसने खान मोहल्ला में एसपीओ रोमन राशिद पर हमला किया था। इसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। पुलिस के मुखबिर होने के शक में त्राल के मिदूरा में मंजूर अहमद हजाम, हिजबुल के लिए पैसा देने से मना करने पर अवंतीपोरा के अमलार में दवा दुकानदार नसीर अहमद गनेई को गोली मार दी थी।

प्रोबेशनरी डिप्टी एसपी भी हिस्सा बने
डाउनटाउन में मुठभेड़ में डिप्टी एसपी (प्रोबेशन) निखिल बोरकर पूरे ऑपरेशन में शामिल रहे। वह किसी भी आतंकवाद निरोधक अभियान का पहली बार हिस्सा बने। शुरू से लेकर आखिर तक ऑपरेशन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी भूमिका की सभी ने सराहना की।

इनके बेटे बना रहे करियर
कश्मीर के नाम पर राजनीति करने वाले हुर्रियत और अलगाववादी नेताओं को भले ही आम कश्मीरी के भविष्य से कुछ लेना देना न हो, लेकिन अपने बच्चों के भविष्य को लेकर वह काफी सजग हैं। कश्मीरी युवाओं के हाथों में किताबों की जगह बंदूक और पत्थरबाजी को बढ़ावा और स्कूल-कॉलेजों में आग लगाने के लिए उकसा कर वहां के भविष्य को स्कूलों और कॉलेजों से दूर करने वाले 112 अलगाववादी नेताओें के 210 बच्चे विदेशों में अपना भविष्य संवार रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, 14 हुर्रियत नेताओं के 21 पुत्र, पुत्रियां, बहनें और बहुएं अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, इरान, तुर्की, मलेशिया और पाकिस्तान में पढ़ रहे हैं या वहां बसकर ऐशो आराम की जिंदगी जी रहे हैं। 
विज्ञापन

कोई अमेरिका तो कोई ऑस्ट्रेलिया

दुख्तरान ए मिल्लत की आसिया अंद्राबी के दो बेटों में से एक मलेशिया में तो दूसरा ऑस्ट्रेलिया में हैं। आसिया की तरह ही गिलानी का दामाद व तहरीक ए हुर्रियत अल्ताफ अहमद शाह उर्फ फंटूश की एक बेटी तुर्की में पत्रकार है तो दूसरी पाकिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। 

हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के बेटे ने पाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई की है। अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक की बहन राबिया फारूक डॉक्टर है और अमेरिका में रहती है। 

इसी तरह से बिलाल लोन की बेटी और दामाद लंदन में रहते हैं जबकि छोटी बेटी ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रही है। मुस्लिम लीग के मोहम्मद यूसुफ मीर और फारूक गतपुरी की बेटियां पाकिस्तान से मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। वहीं डीपीएम नेता ख्वाजा फिरदौस वानी की बेटा भी पाकिस्तान से मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है।

वाहिदत ए इस्लानी के निसार हुसैन राथर की एक बेटी और बेटा ईरान मेें रहते हैं। इसी तरह तहरीक ए हुर्रियत के चेयरमैन अशरफ सेहराई के दो बेटे सउदी अरब में रहकर अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

अमीर ए जमात के जीएम भट्ट का बेटा जहां सऊदी में डॉक्टर है वहीं डीपीएम के मोहम्मद शफी रेशी का बेटा अमेरिका में पीएचडी कर रहा है। तहरीक ए हुर्रियत के अशरफ लाया की बेटी पाकिस्तान से मेडिकल की पढ़ाई कर रही है तो जहूर गिलानी का बेटा सऊदी अरब में रहता है और सऊदी एयरलाइंस में काम कर रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें