शहर से सटे ऐतिहासिक मंदिरों को पर्यटन विकास से जोड़ने की कवायद तेज हो गई है। इस कड़ी में बुनियादी सुविधाएं जुटाने के लिए लखनपुर सरथल डेवलपमेंट अथॉरिटी ने काम तेज कर दिया है। श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए मुकम्मल प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है जिसे मंजूरी के लिए भेजा जाना है।
शहर के निचले मैदानी इलाके एरवां में स्थित ऐतिहासिक मंदिर परिसर के आसपास व्यापक विकास की परियोजना बनाई जा रही है। इसमें टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर से लेकर पार्क विकास, यात्रियों के लिए ढांचागत सुविधा, पार्किगिं सहित कई अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान किए जाने का प्रयास किया जा रहा है।
एलएसडीए के सूत्रों ने बताया कि कठुआ जिले के कुछ मंदिरों का चयन किया गया है। इनमें निचले मैदानी इलाके से एरवां मंदिर को परियोजना में शामिल किया गया है। एरवां में न सिर्फ जम्मू-कश्मीर बल्कि हिमाचल और पंजाब से भी लोग विभिन्न पर्व त्योहारों पर आते हैं।
गुप्ता गंगा में अस्थि विसर्जन और पिंड दान जैसे कार्यों के लिए एरवां को तीर्थ का दर्जा दिया गया है। ऐसे में एरवां तीर्थ स्थल पर सालाना बड़ी संख्या में लोगों का आना जाना रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए एरवां का चयन कर इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है।
पांच करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस प्रोजेक्ट में पर्यटन विकास से जुड़े तमाम पहलू शामिल होंगे। टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर की सुविधा प्रमुखता से शामिल की जाएगी, जबकि यात्री भवन सहित कई अन्य प्रावधान भी किए जाएंगे।
लखनपुर-सरथल डेवलपमेंट अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. भारत भूषण ने बताया कि एरवां के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। इसे मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद अनुमानित पांच करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य करवाए जाएंगे।