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कश्मीर के ‘हिमालयन आइस मैन’ को पद्म श्री

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केंद्र सरकार की ओर से रियासत और देश भर में ‘हिमालयन आइस मैन’ के नाम से मशहूर शेवांग नारफेल को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। इस वर्ष सरकार की ओर से जारी की गई पद्म पुरस्कार विजेताओं की सूची में रियासत से केवल शेवांग का ही नाम शामिल है।
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जम्मू और घाटी से किसी को भी इस बार पद्म पुरस्कार नहीं मिला है। हालांकि, शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में रियासत के खाते में डॉ. बेटिना शारदा बोमेर को भी पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें कश्मीर शैविज्म में उनकी रुचि और शोध के लिए यह सम्मान दिया गया है।

पर मूलत: डॉ. बोमेर आस्ट्रिया की रहने वाली हैं। बोमेर का जन्म 12 अप्रैल 1940 को आस्ट्रिया में हुआ था। डॉ. बोमेर धार्मिक क्षेत्र कई अहम विषयों पर शोध कर चुकी हैं। कश्मीर शैविज्म (योग के माध्यम से शिव से जुड़ने की कला) पर भी डॉ. बोमेर ने सराहनीय काम किया है।
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कौन है हिमालयन आइस मैन?

लेह के गांव स्टाकमो निवासी शेवांग नारफेल पेशे से सिविल इंजीनियर हैं। शेवांग पर्यावरण के क्षेत्र में अहम योगदान दे रहे हैं। ‘हिमालयन आइस मैन’ के नाम से मशहूर शेवांग 12 कृत्रिम हिमनद (ग्लेशियर) बना चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि 2030 तक सभी ग्लेशियर समाप्त हो जाएंगे।

इससे मानवता को होने वाले नुकसान को कम करने और लाखों लोगों को सुनहरा भविष्य देने की दिशा में शेवांग ने कृत्रिम हिमनद बनाने की मुहिम शुरू की थी। शेवांग बताते हैं कि इलाके में बहुत से हिमनद पिघल चुके हैं।

इससे आने वाले समय में होने वाले नुकसान का अंदाजा लगाते भी भय आता है। इसी के चलते पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुनहरे भविष्य के लिए उनसे जो बन पड़ रहा है कर रहे हैं।
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