- आजाद और रैना की आवासीय सुविधा की समीक्षा पर समिति से जवाब तलब
- रिपोर्ट नहीं देने पर समिति अध्यक्ष को कोर्ट में पेश होने का निर्देश
जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्रियों, पूर्व विधायकों और अन्य नेताओं द्वारा सरकारी बंगलों पर कब्जा बनाए रखने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता को अंतिम अवसर देते हुए निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले ताजा स्थिति रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए।
मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली और न्यायमूर्ति रजनीश ओसवाल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई तक रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई, तो नामित समिति के अध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश होना होगा। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता शकील अहमद ने अदालत का ध्यान 26 मार्च 2025 के आदेश की ओर दिलाया, जिसमें वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता एसएस नंदा को तीन सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए गए थे। समिति पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना को दी गई आवासीय सुविधा की समीक्षा कर रही है। अब तक न तो कोई समीक्षा की गई और न ही अदालत के आदेशों का पालन हुआ है।
पीठ ने इस लापरवाही पर नाराजगी जताई और पूछा कि मार्च 2025 के आदेश का पालन करने में इतनी देर क्यों हो रही है। इस पर वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता नंदा ने एक अंतिम मौका मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए साफ किया कि अगली सुनवाई से पहले यदि रिपोर्ट दाखिल नहीं की जाती है, तो समिति अध्यक्ष की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य होगी। जेएनएफ