अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की पीएसए को दी गई चुनौती को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। जस्टिस ताछी रबस्टन ने शुक्रवार को याचिका से जुड़ी दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया। जज ने कहा कि हमारा देश आतंक के केंद्रों, आमूल परिवर्तनवाद, अलगाववाद, अतिवाद की अघोषित लड़ाई लड़ रहा है।
यह गतिविधियां संगठनों और आउटफिट से हो रही हैं, जिसका सामना जम्मू कश्मीर, नार्थ ईस्ट स्टेट, पश्चिम बंगाल तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य कर रहे हैं। इस तरह की गतिविधियों का मतलब है देश को अस्थिर करना। इससे लोकतांत्रिक ढंग से चुनी सरकार को कमजोर करने, सुरक्षा बलों को कमजोर करने, लोगों में डर पैदा करने की कोशिश की जाती है। देश आतंकवाद से लड़ रहा है। इन दलीलों को मद्देनजर रखते हुए जज ने मसर्रत आलम के अंकल की याचिका को खारिज कर दिया। अंकल की तरफ से पीएसए हटाने को लेकर याचिका दायर की गई थी।
पीएसए हटाया
हाईकोर्ट में ही एक अन्य पीएसए से संबंधित याचिका पर सुनवाई हुई। हरकत उल मुजाहिदीन के मोहम्मद अब्दुल्ला गुज्जर ने पीएसए को चुनौती दी थी। जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर ने याचिका से जुड़ी दलीलें सुनने के बाद रिहाई का आदेश दिया। अगर उसके खिलाफ कोई अन्य केस न हो तो।